अब नाम के पीछे गोत्र नहीं, लिखेंगे गावँ का नाम – खाप

एक साल पहले खाप पंचायत में नेतृत्व कर रहे लोगो को पीपुल्स वॉइस सोसाइटी ने पत्र लिखा था कि आप लोगो को जात पात से बहार आना होगा । 
30 जून जागरण अखवार में खबर पढ़ने के बाद महसूस हुआ कि समाज बदल रहा है ।
अब नाम के पीछे गोत्र नहीं, लिखेंगे गावँ का नाम – खाप
संस्था इसमें हर तरीके से साथ खड़ी रहेगी और इनके इस अभियान में हर सम्भव मदद करेगी जिससे समाज मे जात-पात खत्म हो और देश सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े।

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भारत में हर दस में आठ लोग अंतरजातीय विवाह के समर्थक …

इसमें सबसे स्वागत करने योग्य बदलाव यह है कि हर दस में से आठ भारतीय अंतरजातीय विवाह का समर्थन करते हैं।

नई दिल्ली [आइएएनएस]। इस सर्वे में हर दस में से आठ भारतीयों को अंतरजातीय विवाह से कोई गुरेज नहीं था। इस विषय पर 70 फीसद से अधिक पुरुषों ने कहा कि वह अपनी पत्नी के सरनेम में कोई बदलाव नहीं चाहते हैं। इस सर्वे में भाग लेने वाले 50 फीसद लोग दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से हैं। वहीं, 84 फीसद महिलाओं को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि उनका पति उनसे कम या ज्यादा कमाता है। जबकि केवल सात फीसद पुरुषों ने कहा कि उन्हें उनकी पत्नी के अधिक कमाने से परेशानी है । इस सर्वे के मुताबिक 90 फीसद पुरुषों ने कहा कि वह अपनी शादी का खर्च लड़की वालों के साथ आधा-आधा बांटना चाहेंगे। इस सोच में खासा बदलाव आया है। चूंकि परंपरागत सोच यही थी कि दुल्हन का परिवार ही शादी का पूरा खर्च उठाए। सर्वे में बताया गया है कि 16 फीसद पुरुषों ने समाज के दबाव में शादी की जबकि 25 फीसद से अधिक महिलाओं ने कहा कि उन्हें समाज के दबाव में शादी की है। यह भी शादी को लेकर बदली धारणाओं का एक बड़ा उदाहरण है । इनशार्ट नामक कंपनी के सीईओ और सह संस्थापक अजहर इकबाल ने कहा कि अब लोगों की सोच समान अधिकारों को लेकर बढ़ी है। बुजुर्ग पुरुष के आधिपत्य वाले परिवार की रूपरेखा अब बदली है। वैवाहिक संबंध में परंपरागत विचारों और रूढि़यों को अब पीछे छोड़ दिया गया है। इसलिए अब नए समाज के उत्थान के लिए जड़ें जमाई जा रही हैं।

https://www.jagran.com/news/national-eight-people-in-every-ten-in-india-support-the-inter-caste-marriage-an-online-survey-18139030.html

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भारत में सबसे ज़्यादा अंतर्जातीय विवाह कहां होते हैं ?

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It’s official- Tirupattur woman gets ‘no caste, no religion’ certificate

She has always left the two columns blank in application forms. Her parents always left the ‘caste’ and ‘religion’ columns blank in application forms. But for M.A. Sneha, it is now official.

स्नेहा को सर्टिफिकेट सौंपते तिरुपत्तूर जिले के तहसीलदार

Growing up in a family that neither believed in caste nor religion, Ms. Sneha was keen on getting it endorsed.

Her long-drawn battle to get herself officially certified as belonging to ‘no caste, no religion’ came to an end on February 5. An identity was all that 35-year-old Ms. Sneha, an advocate and resident of Tirupattur, wanted.

On February 5, as she received the certificate from Tirupattur tahsildar T.S. Sathiyamoorthy, declaring that she had ‘no caste, no religion’, she saw it as a step towards social change. In fact, revenue officials said this could be the first time that such a certificate was issued in the country. “All my certificates have nil or are blank against the ‘caste’ and ‘religion’ columns. This includes my birth certificate and school certificates.

They mention me as an Indian. But I started to realise that every application form I filled mandated enclosure of community certificate. So, I had to obtain a self-affidavit. It was only then that it occurred to me that I needed an identity that was sans caste and religion,” she said. “When people who believe in caste and religion have certificates, why not issue certificates to people like us?” she asked.

Her quest for a caste-less and religion-less identity began in 2010, but her efforts proved futile, until now. No precedent “I started to apply for a [no religion, no caste] certificate in 2010, but officials kept rejecting it for some reason. Some said there was no precedent in the country. It was in 2017 that I began to stand by ground and explained [my stand] to officials. I justified my stand, saying they should look into my request as I had availed no government schemes or reservation,” she said. It was B. Priyanka Pankajam, Sub-Collector of Tirupattur, who decided to give the green light.

“She wanted to be certified as [belonging to] no caste and no religion. We had to check if her assertions were true. We verified all her school and college documents and found the two columns blank. So, though we found no precedent, we decided to go ahead and certify her as it will not affect anybody or take away another person’s opportunity,” she said.

Ms. Sneha’s husband, K. Parthiba Raja, a Tamil professor, said they left the ‘caste’ and ‘religion’ columns blank in the school application forms for their three daughters. “In fact, their names are a combination of two religions – Aadhirai Nasreen, Aadhila Irene and Aarifa Jessy,” he said.

https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/its-official-tirupattur-womangets-no-caste-no-religion-certificate/article26262132.ece/amp/

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इस महिला को सरकार ने दिया सर्टिफिकेट, अब नहीं है कोई जाति-धर्म

तिरुपत्तूर जिले के तहसीलदार टीएस सत्यमूर्ति ने स्नेहा कोनो कास्टनो रिलिजनसर्टिफिकेट सौंपा. स्नेहा इस कदम को एक सामाजिक बदलाव के तौर पर देखती हैं .

तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की रहने वाली स्नेहा ने एक ऐसा काम कर दिखाया है जो पूरे देश में अब तक किसी ने नहीं किया. पेशे से वकील स्नेहा को आधिकारिक रूप सेनो कास्ट, नो रिलिजनसर्टिफिकेट मिल गया है. यानी कि अब सरकार दस्तावेज़ों में इन्हें जाति बताने या उसका प्रमाण पत्र लगाने की कोई ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

स्नेहा को सर्टिफिकेट सौंपते तिरुपत्तूर जिले के तहसीलदार

स्नेहा को सर्टिफिकेट सौंपते तिरुपत्तूर जिले के तहसीलदार

एमए स्नेहा वेल्लोर जिले के तिरुपत्तूर की रहने वाली हैं. वह बतौर वकील तिरुपत्तूर में प्रैक्टिस कर रही हैं और अब सरकार के द्वारा उन्हें जाति और धर्म रखने की भी इजाज़त मिल गई है. स्नेहा और उनके मातापिता हमेशा से किसी भी आवेदन पत्र में जाति और धर्म का कॉलम खाली छोड़ते थे.

लंबे समय से जातिधर्म से अलग होने के उनके इस संघर्ष की 5 फरवरी को जीत हुई, जब उन्हें सरकार की ओर से यह प्रमाण पत्र मिला. 5 फरवरी को तिरुपत्तूर जिले के तहसीलदार टीएस सत्यमूर्ति ने स्नेहा कोनो कास्टनो रिलिजनसर्टिफिकेट सौंपा. स्नेहा इस कदम को एक सामाजिक बदलाव के तौर पर देखती हैं. यहां तक कि वहां के अधिकारियों का भी कहना है कि उन्होंने इस तरह का सर्टिफिकेट पहली बार बनाया है.

स्नेहा ने न्यूज़18 तमिल को दिए अपने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके परिवार में उनके अलावा उनके मातापिता और तीन बहनें हैं. स्नेहा के मातापिता समेत उनकी सभी बहनें भी पेशे से वकील हैं. उनके मातापिता ने अपनी तीनों बेटियों का नाम स्नेहा, मुमताज और जेनिफर रखा जिससे जाति या धर्म की पहचान हो सके.

उन्होंने बताया कि उनके बर्थ सर्टिफिकेट से लेकर स्कूल के सभी प्रमाण पत्रों में जाति और धर्म का कॉलम खाली हैं. इन सभी में उन्होंने खुद को सिर्फ भारतीय लिखा हुआ है. स्नेहा ने बताया कि जो भी फॉर्म वह भरती हैं उसमें जाति प्रमाण पत्र देना ज़रूरी होता है. ऐसे में उन्हें सेल्फ एफिडेविट लगाना पड़ता. स्नेहा ने कहा कि जो लोग जाति धर्म मानते हैं उन्हें जाति प्रमाण पत्र दे दिया जाता है तो मेरे जैसे लोग जो ये नहीं मानते उन्हें प्रमाण पत्र क्यों नहीं दिया जा सकता.

बता दें स्नेहा ने इस सर्टिफिकेट  के लिए 2010 में अप्लाई किया था लेकिन अधिकारी उनके आवेदन को टाल रहे थे. लेकिन 2017 में उन्होंने अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखना शुरू किया. स्नेहा ने कहा कि तिरुपत्तूर की सबकलेक्टर बी प्रियंका पंकजम ने सबसे पहले इसे हरी झंडी दी. इसके लिए उनके स्कूल के सभी दस्तावेज़ खंगाले गए जिनमें किसी में भी उनका जातिधर्म नहीं लगा था.

स्नेहा के पति के प्रतिभा राजा पेशे से तमिल प्रोफेसर हैं. ये दोनों अपनी तीनों बच्चियों के भी सभी स्कूल सर्टिफिकेट में जाति और धर्म की जगह खाली छोड़ते हैं. यहां तक कि उनकी बेटियों के नाम भी दो धर्मों के कॉम्बिनेशन से बने हुए हैं; अधिरई नसरीन, अधिला इरीन, आरिफा जैसी.

 

https://hindi.news18.com/news/nation/tamilnadu-vellore-first-woman-who-get-no-caste-no-religion-certificate-onm-1691618.html

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Vellore woman wins 9-year-long battle for a ‘no caste, no religion’ identity

no caste, no religion

If India has witnessed rising incidences of caste-based violence in recent times, the country on 5 February also witnessed victory of a lone woman’s fight to have an official ‘no caste, no religion’ identity. Born to parents who decided their daughter would only be recognised as an ‘Indian’ in her birth and school certificates, this 35-year-old lawyer from Vellore had to fight for nine years for a certificate giving her an identity, without caste and religion.

Read the complete no caste, no religion article here

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Hukmdev Narayan Yadav का Lok Sabha में यादगार भाषण, हॅसते रह गए PM Modi & Arun Jaitley

Hukmdev Narayan Yadav का Lok Sabha में यादगार भाषण, हॅसते रह गए PM Modi & Arun Jaitley

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