उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बाद अब लव जिहाद के खिलाफ कानून गुजरात में भी क्यों ?

सादर नमस्ते,

सारे न्यूज चैनल, अखवार, न्यूज वेव पोर्टल से खबर पता चली है कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बाद अब लव जिहाद के खिलाफ कानून गुजरात में भी शामिल हो जायेगा । गुजरात विधानसभा में धर्मांतरण के खिलाफ कानून पास किया गया है । यह कानून कहाँ तक ठीक है इस पर तो पूरा देश भविष्य में चिंतन करेगा ।

गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने मीडिया में जानकारी दी है कि हम “गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट-2003” में संशोधन करने जा रहे है उक्त विल को विधान सभा मे “गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता सुधार विधेयक 2021” के नाम से पेश किया गया । अभी हमारी सोसायटी इस क़ानून का विरोध इसलिए करती है क्यों कि इससे तो देश मे एक खौफ, डर की स्थिति पैदा हो जायेगी । देश का नवयुवक कभी भी अपने धर्म के बहार विवाह की सोच भी नही रखेगा ।

इस पर बहुत सारे लोग जो सही में विवाह जैसे पवित्र बंधन को सही मानते है वह भी इस कानून के दायरे में आ जाएंगे ।

सोसायटी उन गलत लोगो के साथ बिल्कुल भी नही है जो धोखा देकर या जबरजस्ती धर्म परिवर्तन करते है । ऐसे लोगो को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए ।

भारत देश ही एक ऐसा देश है जो सबको साथ लेकर चल सकता है । आज धर्मांतरण जैसे कानून देश को सिर्फ बांटने का काम करेंगे ।

जब से ये कानून बन रहे है देश मे डर पैदा होता जा रहा है ।।

सोसायटी ऐसे असंवेदनशील, असामाजिक तत्व घृणा फैलाने वाले और जबरजस्ती विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन करने वालो का सख्ती से विरोध करती है, वह कोई भी किसी भी धर्म का पालन करता हो ।

लव जिहाद की चर्चा  लगातार होती है । सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती आ रही है । सोसायटी के विचारों को उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री को अवगत कराया था क्यों कि

सोसायटी ऐसे विषय पर 6 सालों से लगातार कार्य कर रही है कि इन सबका हल क्या हो जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है ?  ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या, नफरत फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । धर्म को कोई भी सरकार जबरजस्ती नही पालन करवा सकती है । ये व्यक्ति का बिलकुल निजी मामला है । कोई भी किसी भी धर्म मे विवाह करे । उस पर आपत्ति नही होनी चाहिए ।

सोसायटी को ऐसा लगता है कि हमारे पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर विशेष ध्यान दे ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को गुजरात सरकार अपने राज्य के हर घर तक इतनी जागरूकता फैलाये । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है ।

देश तभी एक हो सकता है जब हमारे मन से जाति, क्षेत्र, धर्म की दीवार समाप्त हो ।

ऐसा कानून से क्या हुआ – उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तो अंतर-धार्मिक विवाह रुकवाने की खबरे लगातार आ रही है । इस कानून से तो सिर्फ अपने धर्मो में विवाह ही सही माना जायेगा ।

हमारी सोसायटी ने सभी राज्यो के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भेजे कि ऐसे कानून नही बनने चाहिए ।

आशा है आप हमारी सोसायटी की सोच को अपने राज्य में जो भी ठीक लगता है उसको पारित करेंगे और अंतरजातीय विवाह पर जो कानून है उसको अधिक से अधिक राज्य में जगरुकता फैलायेंगे ।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

सचिव

पीपुल्स वॉइस सोसाइटी
नई दिल्ली

फोन : +91-124-500-90/91/92

मोबाइल : +91-92055-43360

http://thepeoplesvoice.in/

action taken :- https://hindi.oneindia.com/news/gujarat/gujarat-govt-brought-a-bill-to-assembly-as-amendments-the-gujarat-freedom-of-religion-act-2003-611020.html?story=1

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