यदि कोई मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो उसको पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिये

नमस्ते,                                                                                                                        31/10/2020

आज बीबीसी हिंदी, जागरण, औऱ जी न्यूज जैसे पोर्टल अन्य हर जगह पर ये खबर चल रही है कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना स्वीकार्य नही है

ये पत्र सभी अखबारो के सम्पादक और न्याय मूर्ति एमसी त्रिपाठी को भेज रहे है

हमारी संस्था इस पहलू को अलग तरीके से देखती है और लगातार इस मुद्दे पर काम कर रही है

संस्था का जो कार्य है वह है कि अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए साथ मे अन्तरधर्मो में भी विवाह होना चाहिए ये सही है कि धर्म बदलने की कोई जरूरत नही होनी चाहिए   हाईकोर्ट का आदेश है कि विवाह के पहले धर्म परिवर्तन गलत है लेकिन हमारी संस्था कहती है कि शादी के बाद भी धर्म बदलने की कोई जरूरत नही पड़नी चाहिए।  जो जिस धर्म से है उसी धर्म मे रहकर भी रहा जा सकता है जो जिस पध्दति को मानता है उस हिसाब से मानता रहे लड़का हो लड़की सभी के लिये बराबर का दर्जा होना चाहिए अकसर देखा जाता है कि लड़की को ही धर्म बदलने को मजबूर होना पड़ता है लड़के को नही ये भी ठीक नही है संविधान के अनुसार दोनों को समान अधिकार है लेकिन हमारे पुराने संस्कार और पुराने रीति रिवाजों ने हमे ऐसा जकड़ लिया है कि हम अपनी सोच का दायरा बिलकुल भी नही बढ़ा पाते है

दूसरा यदि कोई मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो उसको पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिये और विवाह के बाद वह जैसे रहना चाहे उसको वैसे रहने के लिये पूरा अधिकार होना चाहिये

उदाहरणएक धर्म की युवती दूसरे धर्म के युवक से विवाह करती है तो ससुराल पक्ष उस युवती को अपने अनुसार पूजा पध्दति मानने के लिए जबरजस्ती करे अकसर देखा जाता है कि उस पर दवाव बनाया जाता है कि वह ससुराल पक्ष को फॉलो करें यह भी ठीक नही है बड़े दुख की बात है कि आज भी हम जाति, धर्म मे उलझे है और इस पर बहुत समय खराब करते है इसका कोई बहुत मजबूत और ठोस कदम यही है जो हम कर रहे है कि आपस मे विवाह होने चाहिए अंतरजातीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही हमे एक दूसरे के समीप लायेगा इसके अलावा जो भी लोग उपाय कर रहे है वह सिर्फ राजनीति है अपने अपने वोट बैंक के हिसाब से जाति, धर्म मे बांट देते है

इसके अलावा हम आपका ध्यान इस एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है सामान्य जनता को इसका पता ही नही है भारत सरकार द्वारा कानूनप्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955″ में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था आज लगभग 64 साल होने को है लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस एक्ट को अलग अलग राज्यो में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन साथ मे अंतर धर्म और अंतर क्षेत्र में विवाह होना चाहिये

आज जो खबरे हम देखते है वह सिर्फ यही दिखाती है कि धर्म परिवर्तन हो गया ।।संस्था फिर एक बार आग्रह करती है कि कुछ भी बदलने की जरूरत नही है जो जैसा है बस उसको स्वीकार कर लेना ही हमारी समस्या का हल है

देश कब तक ऐसे जाति, धर्म के नाम पर बटता रहेगा कभी तो हमे इसके बहार आना ही होगा

संस्था आग्रह करती है कि कृपया हमारे इन विचारों को समझे और देश को एक करने के लिए मदद करे

Kind Regards

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Prithvi Manaktala

General Secretary 

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New Delhi

Tel: +91-124-245-0090

Mob: +91-92055-43360

Website:- www.thepeoplesvoice.in

Blog: https://tpvblog.wordpress.com

action taken on below news articles:

https://www.bbc.com/hindi/india-54757464

https://zeenews.india.com/hindi/india/up-uttarakhand/video/allahabad-high-court-decision-religious-conversion-for-marriage-is-illegal-uppm/776347

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