Appeal for avoiding mention of Religion and Caste in news headlines & reports for improved cohesion in society / अपील – जाति और धर्म से सम्बंधित मुख्य शीर्षक को न छापने का निवेदन

Subject: Appeal for avoiding mention of Religion and Caste in news headlines & reports for improved cohesion in society

Dear Sir/Madam

We are writing this letter on behalf of “The People’s Voice Society” which aims at instilling human & social values and helping to raise the level of public awareness on issues related to citizens’ rights and obligations. Our vision is to see India as a developed economy, peaceful and progressive, with an educated young, healthy and vibrant society. The People’s Voice Society is committed to being active as an instrument of positive and progressive change in the social fabric of Indian society.

We believe that unfortunately there is widespread reporting of news with a religious or caste based perspective with bold headlines, vastly flashed in a major section of the countrywide newspapers and magazines which is facilitating and developing discord. We wish to make a stringent appeal to all journalists / editors / news writers of media houses across the country to stop mentioning religion / caste etc. in headlines of articles (both print and digital), especially those capable of provoking sharp reactions from sections of society and causing communal upheaval. Only if it is absolutely essential to mention these details, only then should it be so mentioned in the article. We believe very strongly if you will stop highlighting the caste/ religion of the news subjects in the headlines, it will certainly have positive impact in our society which is now divided. The main objective of the organization is that all of us should come out of the poison that has spread in people related to man-made straitjackets like caste and religion. Only then can we become a civilized, positive & energetic society.

It has become very depressing to even open the newspapers these days as the headline of majority of articles starts with Caste, Religion or such other dividing factors of the society. A crime under the law is a crime, irrespective of the religion or caste of the offender, which has nothing to do with the crime. Even if the crime is committed due to religion, it is still an offense under the Indian Penal Code.

At the end of the day, human beings have always been serving human beings; this after all is our moral responsibility. This is how society operates.

Kind Regards

Prithvi Manaktala

General Secretary

New Delhi

Tel: +91-124-2450090/91/92

Mob:  +91-92055-43360

Website:- www.thepeoplesvoice.in

Blog: https://tpvblog.wordpress.com

विषय : अपील – जाति और धर्म से सम्बंधित मुख्य शीर्षक को न छापने का निवेदन                                                  

सादर नमस्ते,

हम “द पीपुल्स वॉयस सोसाइटी” की ओर से ये पत्र लिख रहे है । जो मानवीय मूल्यों को  स्थापित करने के उद्देश्य से बना है, विशेष रूप से सामाजिक, सभी अधिकारों और दायित्वों के प्रत्येक नागरिक के बारे में सभी मुद्दों पर सार्वजनिक जागरूकता के स्तर को बढ़ाने में मदद कर रहा है। हमारी दृष्टि एक शिक्षित युवा, स्वस्थ और जीवंत समाज के साथ, भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में देखना है, जो शांतिपूर्ण और प्रगतिशील है। द पीपुल्स वॉइस सोसायटी भारतीय समाज के सामाजिक ताने-बाने में सकारात्मक और प्रगतिशील परिवर्तन के एक साधन के रूप में सक्रिय होने के लिए प्रतिबद्ध है और साथ ही साथ व्यापक स्तर पर समाज के उत्थान और बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध तरीके से कार्यरत है । हमारी संस्था लगातार देश को एक करने के लिये प्रयासरत है ।

हम मीडिया हाउस के सभी  पत्रकारों / संपादकों / समाचार लेखकों को अपील करते हैं कि वे सुर्खियों में धर्म / जाति आदि का उल्लेख करना बंद करें। केवल अगर इन विवरणों का उल्लेख करना पूरी तरह से आवश्यक है, केवल तभी इसे लेख में उल्लिखित किया जाना चाहिए। हम बहुत दृढ़ता से विश्वास करते हैं यदि आप समाचार विषयों के जाति / धर्म को सुर्खियों में लाना बंद कर देंगे, तो निश्चित रूप से हमारे समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जो अब विभाजित है। संस्था का मुख्य उद्देश्य है कि जातिगत और धर्म से सम्बंधित लोगो मे जो जहर फैल गया है उससे हम सभी को बाहर आना चाहिये । तब हम एक सभ्य, सकारात्मक, ऊर्जावान समाज बन सकते है

इन दिनों समाचार पत्रों को खोलना बहुत निराशाजनक हो गया है क्योंकि अधिकांश लेखों की शुरुआत जाति, धर्म या समाज के ऐसे अन्य विभाजन कारकों से होती है। हम मानते हैं कि सुर्खियों में हमेशा अपराधी या पीड़ित के जाति या धर्म का उल्लेख नहीं करना चाहिए। कानून के तहत अपराध तो अपराध है , चाहे अपराधी का धर्म या जाति कोई भी हो, जिसका अपराध से कोई लेनादेना नहीं है। भले ही अपराध धर्म के कारण किया गया हो, फिर भी यह भारतीय दंड संहिता के तहत एक अपराध है।

आपकी सारी खबरे सकारात्मक और देश को सच से रूबरू कराती है हम लगातार आपकी खबरों को पढ़ते आ रहे है । लेकिन जाति, धर्म का मुख्य टाइटल लिखा होता है तो संस्था लगातार इसका विरोध करती रही है कि हिन्दू मुसलमान लिखने से भाई चारा नहीं बढ़ता है जबकि लोगों के मन मे फिर से ख्याल आ जाता है कि वह किसी धर्म से है । किसी की जाति, धर्म लिखकर खबर को बनाना सही नही है । हम लगातार सभी अखवारों के संपादको को इसके बारे में अवगत कराते रहते है ।

ऐसी खबरों को बिना धर्म लिखें भी सकारात्मक तरीके से लिखा जा सकता है। मानव, मानव की सेवा हमेशा से करता आ रहा है ये तो हमारा फर्ज नैतिक जिम्मेदारी है । जो भी मदद करता है बहुत अच्छा है । समाज ऐसे ही चलता है ।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

“सचिव”

“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”

“नई दिल्ली”

फोन : +91-124-416-4000

मोबाइल : +91-92055-43360

वेवसाइट : http://thepeoplesvoice.in/

ब्लॉग :   https://tpvblog.wordpress.com/

*The above letter has been sent all media houses functioning in the country in an attempt to reduce the increasingly divisive news items being published across print and digital media in the country.

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