देश के सभी स्वतंत्र प्रतियोगी जो 17वीं लोक सभा 2019 में खड़े हुये थे उनको संस्था की तरफ से भेजा जा रहा पत्र

21/10/2019

सेवा में,                                                                                                          

सम्मानीय महोदय,

स्वतंत्र प्रतियोगी,

17वीं लोक सभा, 2019

विषय – देश को एक करने के लिये अंतरजातीय विवाह, अंतर क्षेत्रीय व अंतर धर्मो में विवाह और पार्टीलेस पार्लियामेंट के विषय पर अपने विचारों को व्यक्त करें

सादर नमस्ते,-

2019 के चुनाव में जो भी प्रत्यासी स्वतंत्र खड़े हुये थे उन सबको एक पत्र हमारी संस्था की तरफ से भेजा जा रहा है । उन सभी मे एक आप सम्मानीय सदस्य है । हम आपको अपनी संस्था के बारे में बताने से पहले आपका ध्यान आज की राजनीति पर ले जाना चाहते है । अच्छे और योग्य व्यक्तियों को जो काम करते है और करना चाहते है लेकिन उनको टिकट ही नही मिल पाता है । जो स्वतंत्र खड़े होते है उनके ऊपर बहुत सारे दबाव रहते है जिनके कारण वह राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के पहले ही अलग हो जाता है और दुःख की बात ये है कि जो पार्टी चुनाव जीतती है तो जिस पार्टी की जो विचारधारा है उसी को पूरे देश मे लागू करना चाहते है । देश को इतना बांट दिया गया है कि हम सभी को कोई मजबूत कदम उठाना ही पड़ेगा । आज हमे छोटी छोटी जातियाँ, क्षेत्र, सम्प्रदाय, अलग अलग धर्मो से देखा जाता है जो कि मनुष्य जाति के लिये बहुत ही चिंताजनक बात है । ईश्वर द्वारा बनाई गयी सृष्टि में ये मतभेद नही थे उसके लिये सभी समान पैदा होते है । हम ऐसा समाज बना रहे है कि एक दिन सब कुछ होते हुये भी कुछ नही कर पायेंगे। अब हम आपको अपनी संस्था के बारे में अवगत कराना चाहते है -हम आपका ध्यान एक ऐसे अधिनियम के बारे में ले जाना चाहते है जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स अधिनियम 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक अधिनियम आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस अधनियम के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस पर भी आप गम्भीरता से सोचे । जिससे अधिक से अधिक इसका लोग लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है ।देश मे कुछ इस सम्वेदनशील मुद्दे को लेकर सकारात्मक परिणाम भी सामने आये है जिनको आपके सामने रख रहे है : -संस्था की तरफ से लगातार सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय एवं सशकितकरण मंत्री, केंद्रीय मंत्री या इससे जुड़े हुये सभी को पत्र भेजने के बाद – 1- उड़ीसा सरकार और हरियाणा सरकार ने इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार किया और सकारात्मक बदलाव लाये ।पहले अन्तरजातीय विवाह करने वालो को 50 हजार रुपये मिलते थे दोनों सरकारों ने इसकी राशि बढ़ाकर 2,500000 तक कर दी । समाचार पत्रों की रिपोर्ट को देखते हुये हम ये आंकड़े रख रहे है । हरियाणा सरकार ने 2017 में इन्सेंटिव बढ़ाये जाने पर मात्र एक साल में 2018 तक अंतरजातीय विवाह में तीन गुना बढोत्तरी हुयी है । इन्सेंटिव बढ़ाये जाने पर अंतरजातीय विवाह में उड़ीसा में भी बहुत बढोत्तरी हुयी है ।2. तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की रहने वाली स्नेहा ने एक ऐसा काम कर दिखाया कि पूरे देश मे आज तक किसी ने नही किया । स्नेहा अपना धर्म या सरनेम दिखाने के लिये बाध्य नहीं है, सरकार ने इस महिला को दिया सर्टिफिकेट – अब किसी जाति या धर्म की नहीं है कोई बाध्यता ।3- द पीपुल्स वॉइस सोसायटी संस्था के द्वारा भेजा गया खाप पंचायत को पत्र – अब खाप पंचायत जैसी संस्था जो जातिगत मामलों में बहुत ही खबरों में आती रही है इस संस्था ने भी अब एक अभियान समाज के लिए खड़ा किया है कि कोई भी खाप पंचायत में विवाह करेगा तो उसका सरनेम नही लिखा जायेगा और जातिगत मामलों से देश दूर हो इस पर खाप पंचायत काम कर रही है ।संस्था हर राज्य में इंसेंटिव बढ़ाये जाने पर जोर दे रही है जिससे लोग अधिक से अधिक संख्या में विवाह करे ।। संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना चाहिए साथ मे अंतरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्मों में भी विवाह होना चाहिए । यहाँ उल्लेख करना उचित होगा कि स्वर्गीय डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने लाहौर में जाट- पाट टोडक मंडल के 15 मई 1936 के वार्षिक सम्मेलन में भाषण देने के लिए “जाति का उन्मूलन” शीर्षक से तैयार भाषण दिया, जो वास्तव में कुछ आपत्तिजनक सामग्रियों के कारण आमंत्रण को वापस लेने के कारण अपरिवर्तित रहा। आयोजकों के रूप में सम्‍मिलित है। चूँकि उन्होंने अपनी लागत से छपी हुई 1500 प्रतियाँ वितरित की थीं। भाषण के पैरा 20.5 में वे लिखते हैं – डॉक्टर अंबेडकर ने 1936 में कहा था – “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अंतरजातीय विवाह ही जातिगत भेदभावों को मिटाने का अचूक उपाय है ।”इससे तो देश एक हो जायेगा लेकिन राजनीतिक पार्टियां फिर से अपने तरीके से देश को बांट देंगी ।आज हमें एक नये विकल्प की जरूरत है जिस विकल्प की जरूरत है जो हमें लगता है वह आपसे शेयर कर रहे है कि पार्टीलेस पार्लियामेंट होनी चाहिए । किसी पार्टी की कोई जरूरत नही है । हर व्यकित अपने क्षेत्र से स्वतंत्र खड़ा होकर चुनाव लड़े और इस तरह अलग अलग सोच के लोग जो किसी पार्टी से सम्बंध नही रखते है वह जब संसद में पहुँचेंगे तो एक अलग ही प्रारूप दिखाई देगा । सब कुछ वैसे ही चलेगा लेकिन कोई पार्टी नही होगी ।इन सबके बारे में आपसे विस्तार से चर्चा करने के लिये भेंट होना जरूरी है । जब आप समय निकाल पाये तो बताये हमारी संस्था इस पर आगे की भविष्य की कार्यशैली पर बात करेंगे ।आपसे विनम्र निवेदन है कि इस पर गम्भीरता से सोचे ।ये दोनों ही काम सोचने में लग सकता है कि सम्भव नही है लेकिन कोई भी काम ऐसा नही है जिसका विचार आया हो वह पूरा न हो ।

संस्था इस पर पूरी तरह से गम्भीर है और हर दिन इस पर काम कर रही है हो सकता इसका परिणाम हमे तुरंत दिखायी दे लेकिन भविष्य में सकारात्मक रूप लेगा

धन्यवाद

भवदीय

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पृथ्वी मानकतला”सचिव”

पीपुल्स वॉइस सोसाइटी
नई दिल्ली

फोन : +91-124-416-4000

मोबाइल : +91-92055-43360

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