संस्था की तरफ से सरकार में बैठे और सभी सामाजिक मुद्दों में काम कर रहे इस सम्वेदनशील मुद्दे पर प्रतिष्ठित लोगो को एक कॉमन पत्र…

विषय – क्या अंतरजातीय विवाह, अन्तरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्म विवाह देश को आज जरूरत है ?

नमस्ते,
आज पूरा देश जातिवाद, धर्म के नाम पर झगड़ रहा है क्यों कि लोगो ने इसको अपनी शान-शौकत से जोड़ रखा है ।
जाति और धर्म से लोगो ने अपनी पहचान बना रखी है । समाज दिन प्रतिदिन इसकी गलत धारा में जा रहा है और लोगो मे जातिगत भेदभाव की खाई बनती जा रही है ।
हम आपको अपनी संस्था के बारे में बताना चाहते है ।
हमारी संस्था इन सबसे ऊपर उठकर बात करती है और काम कर रही है । देश को धर्म, जाति से ऊपर आना ही होगा । तभी देश एक होगा ।
हमारा देश आजाद हुआ है उस समय से लेकर आज तक बट ही रहा है । पूरे भारत देश को इतना बांट दिया गया है कि लोग अपना असितत्व ही भूल गये है । सारे धर्म, अलग अलग जाति, ढ़ेर सारे समुदाओ में मनुष्य पहले से ही बंटा हुआ है । इस धरती पर सारी सन्तान माँ के गर्भ से ही निकलती है । जिनमे कोई भेदभाव नही होता । जब बच्चा पैदा होता है तो उसको कुछ नही पता होता, लेकिन बच्चा बड़े होते ही समाज उसको बांट देता है । क्यों कि उसको ऐसा माहौल मिलता है कि वह मजबूर हो जाता है कि वह मनुष्य नही है । कोई हिन्दू है, कोई मुसलमान है, कोई क्रिश्चियन है, कोई इस जाति का है, कोई उस जाति का है ।
अब हम आपका ध्यान एक ऐसे एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस पर भी आप गम्भीरता से सोचे । जिससे अधिक से अधिक इसका लोग लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना चाहिए साथ मे अंतरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्मों में भी विवाह होना चाहिए ।
डॉक्टर अंबेडकर ने 1936 में कहा था – “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अंतरजातीय विवाह ही जातिगत भेदभावों को मिटाने का अचूक उपाय है ।”
आपस मे विवाह ही एक ऐसी कड़ी है जो आपस मे लोगो को जोड़ सकती है । विवाह एक पवित्र वन्धन है । जिसके बाद एक नया बच्चा जन्म लेता है । उसके बाद बच्चे का भविष्य और देश के भविष्य का निर्माण होता है । इनमे कोई भी भेद भाव नही होना चाहिए । हमारे मन में ये प्रश्न नही उठना चाहिए । कि हम किस जाति, धर्म के है । इससे सबसे बड़ा सकारात्मक परिणाम ये निकलकर आयेगा कि आने वाली पीढ़ी के बच्चों में से ये मानसिकता खत्म हो जायेगी । कि हम किस जाति के है । वह बच्चे अपने आपको मानवता-इंसानियत की तराजू पर तौलेंगे । इससे क्या होगा ? इससे एक दिन समाज में जातिवाद सब कुछ समाप्त हो जायेगा । संस्था की तरफ से कुछ सुझाव है कि जो भी लोग अंतरजातीय विवाह करते है । उनको ये सुविधाएं मिलनी चाहिए । साथ मे ये सुविधाएं अंतरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्म करने वालो को भी मिलनी चाहिये : –

  1. सरकार की तरफ से उनको अलग अलग राज्यो में जो भी पैसा अभी वर्तमान में दिया जा रहा है उसको बढ़ाया जाये ।
  2. फ्री हनीमून या इसी के अनुकल पैसा मिलना चाहिए ।
  3. युवक और युवती दोनों को सरकारी नोकरी मिलनी चाहिए
  4. इनकम टैक्स में छूट मिलनी चाहिए ।
  5. उनके बच्चों को फ्री शिक्षा मिलनी चाहिए ।
  6. उनके बच्चो को सरकारी नोकरी मिलनी चाहिए ।

इन पॉइंट्स को अधिक से अधिक फैलाया जाए और सरकार की अधिक से अधिक जागरूकता होनी चाहिए । इस बारे में लोगो में चर्चा होनी चाहिए ।

ये सब इसलिए है जिससे लोग शादी ज्यादा से ज्यादा करे । इन सबमे बहुत समय लग सकता है लेकिन देश में एक चिंगारी उठनी चाहिए । एक चिंगारी ही काफी है । नकारात्मक सोच से सकारात्मक सोच की तरफ आगे बढ़ने के लिए । देश बदलने का सब प्रयास करते है लेकिन कुछ भी नही बदलता है । वही प्रश्न फिर उठता है कि आखिर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश क्यों नही बदल रहा है । कही न कही हम भारी चूक कर रहे है । शायद हम सभी लोग जाति धर्म में ही उलझकर रह गये है । आशा करता हूँ आप हमारी संस्था के पक्ष को समझ रहे होंगे ।
देश मे कुछ इस सम्वेदनशील मुद्दे को लेकर सकारात्मक परिणाम भी आये है जिनको आपके सामने रख रहे है : –
1- संस्था की तरफ से लगातार पत्र भेजने के बाद उड़ीसा सरकार और हरियाणा सरकार ने इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार किया और सकारात्मक बदलाव लाये ।
पहले अन्तरजातीय विवाह करने वालो को 50 हजार रुपये मिलते थे दोनों सरकारों ने इसकी राशि बढ़ाकर 2,500000 तक कर दी जिससे अन्तरजातीय विवाह में बहुत बढोत्तरी हुयी ।

2-तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की रहने वाली स्नेहा ने एक ऐसा अद्भुत काम कर दिखाया कि पूरे देश मे आज तक किसी ने नही किया । स्नेहा अपना धर्म या सरनेम दिखाने के लिये बाध्य नहीं है, सरकार ने इस महिला को इंसानियत का दिया सर्टिफिकेट – अब किसी जाति या धर्म की नहीं है कोई बाध्यता ।
3- द पीपुल्स वॉइस सोसायटी संस्था के द्वारा भेजा गया खाप पंचायत को पत्र – अब खाप पंचायत जैसी संस्था जो जातिगत मामलों में बहुत ही खबरों में आती रही है इस संस्था ने भी अब एक अभियान समाज के लिए खड़ा किया है कि कोई भी खाप पंचायत में विवाह करेगा तो उसका सरनेम नही लिखा जायेगा और जातिगत मामलों से देश दूर हो इस पर जींद खाप पंचायत काम कर रही है ।

आप इन सब मुद्दे पर हमारी संस्था से बात करना चाहे तो हमे ख़ुशी होगी । हम इस पर बैठकर बात कर सकते है । इस पर एक सकारात्मक परिणाम लाने की दिशा में काम कर सकते है ।
संस्था ने इस मुद्दे पर सूचना का अधिकार के तहत कुछ सूचना भी मांगी थी । जिनकी जानकारी आपके साथ बांट रहे है । सभी राज्यो में सूचना का अधिकार के तहत RTI डाली जिसमे पता चला 2010 से 2017 वर्तमान तक जो हमे आकंड़े प्राप्त हुये है -उससे पता चला कि इस एक्ट के बारे में लोगो को जानकारी ही नही है । बड़े ही निराशाजनक आंकड़े प्राप्त हुए है । हमारी संस्था को लगता है इस एक्ट पर समाज मे जागरूकता फैलानी चाहिए । अधिक से अधिक लोगो तक बात पहुँचनी चाहिए । पुनः आपसे विनम्र आग्रहपूर्ण निवेदन है कि एक बार हमारी संस्था से इस बारे में बात हो तो एक सकारात्मक पक्ष आपके सामने रखूँ और बारीकियों से इस मुद्दे पर अपने कुछ अनुभव सांझा करू । एक जिम्मेदार संस्था होने के नाते हम चाहते है कि देश के विकास में हमारा भी कुछ योगदान हो ।

आशा करते है आप हमारी संस्था की भावनाओं को समझ रहे होंगे । जल्द ही आपसे व्यक्तिगत मीटिंग हो ऐसी आशा करते है ।

आपके सरकार के साथ हमारी संस्था इस मुद्दे पर किसी भी तरीके से काम कर सकती है तो हमें खुशी होगी । हमारी संस्था का भी देश को एक करने में योगदान होना चाहिये ।

भवदीय

पृथ्वी मानकतला
“सचिव”
“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”
“नई दिल्ली”

http://thepeoplesvoice.in/

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