नुसरत जहाँ मामले पर देवबंदी उलमा ने जो फतवा लगाया, उससे सम्बन्धित पीपुल्स वॉइस सोसायटी ने इसके मुख्य असद कासमी को पत्र लिखा : –

सेवा में,
सम्मानीय असद कासमी,
देवबंदी उलमा और जामिया शेखुल
हिन्द के मोहतमिम मुफ़्ती,
मोहतमीम,
दारुल उलूम देवबंद,
जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश,
भारत, पिन – 247554

विषय – नुसरत जहाँ के सिंदूर लगाने से आपत्ति और फतवा लगाये जाने से सम्बंधित पत्र

नमस्ते,
1 जुलाई अमर उजाला और अन्य अखवारों, न्यूज पोर्टल जैसे नवभारत टाइम्स में खबर पढ़ने के बाद इस पत्र को लिख रहे है । 
देवबंदी उलमा ने नुसरत जहाँ के सिंदूर लगाने पर आपत्ति जताई । ऐसी हेडलाइन देखने पर हमारी संस्था को आपके काम करने के तरीके और एक ही मजहबी रंग में रंगे नजर आते है । यदि नुसरत जहाँ ने सिंदूर लगा लिया तो धर्म कैसे खतरे में आ गया । क्या इतना कमजोर है धर्म । जरा इस पर विचार करे । 
आपने कहा कि इस्लाम के मुताबिक मुसलमान सिर्फ मुसलमान से शादी कर सकता है किसी अन्य धर्म के ब्यकित से नही । 
कृपया इन सब रीति रिवाज से बहार निकलकर सोचिये । नुसरत जहाँ एक सफल महिला है जिन्होंने अपने तरीके से जीवन जीते हुये समाज के सामने एक सकारात्मक प्रस्तुति पेश की है जो कि सम्मानजनक है । आपको ऐसी महिलाओं को समर्थन देना चाहिये न कि उनके खिलाफ जाकर फतवा जैसे शब्दों का प्रयोग करके उनको दबाना चाहिये ।
जरा सोचिये जब मनुष्य का जन्म हुआ तो वह क्या किसी जाति, धर्म, सम्प्रदाय का होता है । ये सब हम उस आने बाले बच्चे को समाज द्वारा उसको बताते है कि तू इंसान नही है, तू तो हिन्दू है, मुसलमान है, क्रिश्चियन है, इस जाति का, उस जाति का है और वह धरती पर आया हुआ नया बच्चा धीरे धीरे वही मानने लगता है । क्यों एक बच्चे को इंसान से इंसानियत छीन रहे है ये ईश्वर, अल्लाह या जो भी नाम दे जिसकी जो श्रद्धा है वह मनुष्य को कैसे बांट सकता है क्यों समाज को बाँटने में लगे है । 
कब तक बाँटोगे …..?
आखिर कभी तो अंत होना ही होगा इस जाति, धर्म से ऊपर होकर मनुष्य सोच पाये । क्यों अपने एक घेरे से बहार नही निकल पा रहे ऐसी क्या मजबूरी है । 
हमारी संस्था पिछले कई वर्षो से मनुष्य को मनुष्य बनाने का प्रयास कर रही है लेकिन आप जैसे लोग, वह किसी भी धर्म के हो । जो धर्म के ठेकेदार बने बैठे है वह मनुष्य को मनुष्य नही बनने दे रहे है । 
कृपया आपसे विनम्र आग्रहपूर्ण निवेदन है कि इनसे बहार निकलकर दुनिया को देखिये । हम मनुष्य सभी अंदर से एक ही है । वही खून, वही प्राण, वही सांसे, वही दिल सब कुछ समान है लेकिन इस जाति, सम्प्रदाय, धर्म के द्वारा बांट लिया है जिसको आप जैसे लोग उसको कम करने की बजाह और बढ़ा रहे है । 
हमारी संस्था इन सबसे ऊपर उठकर सोचती है और मनुष्य को एक करने में हर सम्भव प्रयास कर रही है । इसके लिए संस्था आपस में अंतर जातीय विवाह, अंतर क्षेत्र और अंतर धर्मो में शादी हो ऐसा प्रयास कर रही है जिससे लोग विवाह करके जाति, धर्म से ऊपर होकर सोच पाये । 
इस विश्व मे एक ही परिवार हो वह हो मानव परिवार ।
आशा करते है आप हमारे पत्र को समझ रहे होंगे ।
कृपया इस नुसरत जहाँ केस पर अब कोई नकारात्मक टिप्पणी न करे ।

धन्यवाद

भवदीय
पृथ्वी मानकतला

सचिव
द पीपुल्स वॉइस सोसायटी
नई दिल्ली
www.thepeoplesvoice.in

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