Activity Report of TPV till December 2021

1. Society’s tremendous efforts manifested in Rajya Sabha, when an MP raised the issue of Inter-caste marriage, by saying that this is the only way to make India one. Referring to this, a letter has been sent to the Social Justice Minister and the Chief Ministers of all the States. The letter was intended to request them to spread awareness about the law on inter-caste marriages secured in the “The Protection of Civil Rights Act 1955”.

2. Bihar’s Tejaswi Yadav has done an Inter-caste marriage with the consent of the family. BJP’s Sushil Kumar Modi has also appreciated the move. The People’s Voice Society found it a praiseworthy step and sent an appreciation letter to both of them emphasizing that such thought process will set an example to follow.
Appeal has been made to Chief Ministers of all the states, for creating
awareness about the law on Inter -caste marriage enacted in 1955.

3. Letters have been sent to all the Chief Ministers, Cabinet Ministers, Home Minister, Minister for Social Justice and PMO regarding the negative consequences of laws on Love Jihad. Such laws don’t augur well for the country and no state should enact these.

4. Many politicians are trying to divide the country based on the terms Hindu and Hindutva and majority of them come from RSS and BJP. Chanting slogans to promote Hindutva has become a trend for petty minded politicians. “This country belongs solely to Hindus “is new in the series.
To deter their divisive mindset, letters describing the repercussions of such actions, have been sent to all electronic media and editor in chief of all leading newspapers. We have urged them, not to give space to such divisive terms in their news content. A copy of the same has also been sent to Mr. Mohan Bhagwat, the RSS Chief.

5. Recently, Offering Namaz in open spaces in Gurgaon has become a sensitive issue for which TPV has raised its voice.
TPV strongly feels that Religious practices should only be offered at the designated places and not in open spaces. Simultaneously, it emphasizes the need of developing an alternate arrangement to avoid any clash and to protect the sentiment of every Indian irrespective of their religion/caste.
Particularly in this case, our society feels that organizations/Employers /Government should provide a space for offering Namaz to their Staff/ Workers/Employees. It is our firm belief that an immense sense of getting protected and respected will certainly be developed amongst them in response.
Letters expressing the abovementioned sentiments have been sent to the chief Ministers of all the states including Haryana.

6. Society is creating awareness on all the subjects discussed above through blogs and different social media platforms. All these platforms such as TPV Facebook page, twitter handle and blogsite are being updated timely.

1.
सोसायटी के लगातार प्रयास से राज्यसभा में एक सदस्य ने अंतरजातीय विवाह का मुद्दा उठाया और कहा है कि देश को एक करने का यही एक मात्र हल है । जिस पर सोसायटी ने मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस के मंत्री और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर
“प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये जो एक एक्ट है इसको अधिक से अधिक अपने राज्यो में जागरूकता फैलाए ।

  1. ट्विटर, फेसबुक, ब्लॉग, वेवसाइट पर सोसायटी के सारे कार्यो को लगातार अपडेट किया गया ।
  2. विहार में तेजस्वी यादव ने अंतरजातीय विवाह किया । जिसको बीजेपी के सुशील मोदी ने खूब तारीफ की । सोसायटी ने इन लोगो को सकारात्मक पत्र भेजे ।
    इस खबर को सभी मुख्यमंत्री को अपने राज्यों में इसका अच्छे से पालन हो । पत्र लिखकर आग्रह किया और अंतरजातीय विवाह के एक्ट को अधिक से अधिक पालन हो इस पर सरकार कार्य करे ।
  3. देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, सभी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा कि जो देश मे कई राज्यो में धर्मांतरण पर कानून आ रहें है । उस पर सोसायटी सख्त विरोध करती है । ऐसे कानून देश हित मे नही है । देश मे ऐसे कानून सिर्फ नफरत फैला रहे है और लोगो को कट्टर बना रहे है जो कि पूरे मानव समाज के लिए ठीक नही है ।
  4. हिन्दू और हिंदुत्व पर सभी नेताओं के कई बयान आये है विशेषकर आरएसएस और बीजेपी के बयान बता रहे है कि ये देश सिर्फ हिन्दुओ का है और हम सभी हिन्दू है ।
    सोसायटी ने आरएसएस के मोहन भागवत, टीवी चैनल, अखबार के मुख्य सम्पादक और सभी मुख्यमंत्री को आगाह किया कि ऐसे बयान न दे और ऐसी खबरें न चलाये ।
  5. जाति, धर्म पर डिबेट और अखबार के मुख्य पृष्ठ पर जाति, धर्म पर छपी खबर हमारे मन को बांट देती है ।
    सभी टीवी चैनल, अखबार के सम्पादक को पत्र लिखकर इस पर रोक लगनी चाहिए । कृपया ऐसी डिबेट न कराये और हेडलाइन न छापे ।
    सभी को पत्र भेजे ।
  6. गुड़गांव में जो नमाज पढ़ी जा रही है उस पर भी बहुत विवाद हुआ है ।
    सोसायटी ने इस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री और सभी मुख्यमंत्री को पत्र भेजा । जिससे अन्य जगह ऐसी स्थिति न बने जिसमें धर्मो के बीच नफरत हो ।
    सोसायटी ने खुले स्थानों पर नमाज का विरोध किया है लेकिन इसका हल भी बताया कि जो जहाँ कार्य करता है वही पर कम्पनी, फैक्टरी द्वारा नमाज पढ़ने की व्यवस्था होनी चाहिए या सरकार कोई ऐसी जगह तय करे जिससे उनकी आस्था भी बनी रहे ।
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वेब पोर्टल बिहार टुडे का धन्यवाद..अंतरजातीय विवाह होना चाहिए । इसको सकारात्मक छापा ।

11/01/2022
सादर नमस्ते,


बिहार टुडे हिंदी वेब पोर्टल और अन्य जगह इस खबर को पढ़कर पत्र लिख रहा हूँ । https://bihartoday.net/yojana/sarkari-yojana-2022-government-gives-3-lakh-rupees-for-marriage.html
ये खबर बिहार टुडे ने बहुत ही सकारात्मक निकाली है । इस खबर को पढ़ा तो अत्यंत प्रशन्नता हुयी कि अंतरजातीय विवाह का जो एक्ट है उसको आप समाज मे जागरूकता फैला रहे है । अंतरजातीय विवाह में जो स्कीम है । राज्य में अंतरजातीय विवाह होना चाहिये इसको लेकर बड़ी सकारात्मक बातें की और पूरे एक्ट को बिहार की जनता के सामने रखा है ।

हम आपको अपनी सोसायटी के बारे में अवगत कराना चाह रहे है ।
हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 66 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । बिहार में लोग इस कानून के बारे में जानते तक नही है ।

सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य विहार प्रदेश में जन जन तक जागरूकता फैलानी चाहिए । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में भी विवाह होना चाहिये ।


हम सभी को जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिये ।वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । वह अंतरजातीय विवाह ही है । सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है ।


आशा है कि आपका वेब पोर्टल इस को भी छापेगा । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है ।
अंतरजातीय विवाह करने पर जो पैसा अभी दिया जा रहा है उसको बढ़ाया जाना चाहिये । जिससे लोग अधिक से अधिक अंतरजातीय विवाह करे ।
आशा है आप इन सभी सुझावों पर ध्यान देंगे और हमारी बातों को जनजन तक पहुंचाने में मदद करेंगे और सोसायटी को अपने वेब पोर्टल में इस विषय पर काम करने का मौका देंगे । जिससे जो भी सोसायटी का अनुभव है वह आपके वेब पोर्टल में सकारात्मक ऊर्जा को लेकर आये और पूरी मानवता के लिये कार्य कर सके ।
हम फिर से आपकी सराहना करते है कि आपने अंतरजातीय विवाह करने वालो पर सकारात्मक खबर दिखाई ।


धन्यवाद द पीपुल्स वॉयस सोसायटी

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I am writing this with reference to the article published in The Times of India,dated 7th December2021,captioned as: Toolkit for the Indian reformer

I am writing this with reference to the article published in The Times of India,dated 7th December2021,captioned as: Toolkit for the Indian reformer

For any society to prosper it’s imperative that laws are reviewed and reforms should follow as per changing times. Its very tough process since collateral damages are part and a small price for any change. A stable and secured governance system devoid of parochial interest is must for this whole process.

In current scenario, Democratic laws and reforms are like a puppets in the hands of politicians, which they manipulate as per their convenience. Political parties tend to choose politics over nation. The political system has denigrated the feeling of a common man to the lowest possible level. A state where all hopes are getting lost!

We at “The People’s Voice Society”, as anguished citizens with the present system, have been applying our minds to it and prepared a paper on the suggested change.We are presenting here a“New Governance System” as a replacement of the existing one!

The salient features are mentioned below:

  • Introduce a new public service commission to facilitate aspiring politicians future-ready. It could be named “The Indian Governance Service “or IGS.  Nurturing accomplished leaders by imparting proper education and training should be the ultimate goal of the institution. It can run on the lines of existing services such as IAS, IPS, IFS.
  •  Establish State-wise Universities to educate the aspirant politicians to start their career in politics. Such Universities could name as”University of Governance”.
  • Universities should have a curriculum to cover all the ministries /constitutional posts.
  • Those aspirants who qualify from the University of Governance should become eligible to fight the election as independent candidates.
  • There should be no political party. All elections should be State-funded and conducted under the aegis of the Election Commission once every five years.
  • Starting from Panchayats, Municipalities, Vidhan Sabha, Lok Sabha, Rajya Sabha, all should have independent members with a Full Term of 5 years.

Vidhan Sabhas/Lok Sabha/Rajya Sabha should have fixed tenure and time table similar to Schools,courts etc.

  • All Ministers in States and centres up to Prime Ministers should get elected by Vidhan Sabha, Lok Sabha, and Rajya Sabha members.
  • All statutory bodies like various Armed forces, Police, Taxation, and various others will independently work under the supervision of Parliament. In case a no-confidence motion against PM and his cabinet are passed, PM and others can be elected from the same Parliament ensuring that the duration of 5 years of Parliament does not get disturbed.In other words ,there should be no provision of dissolution of house.

The members of the “The People’s Voice Society” are always willing to have an open discussion. It can better improve the above situation.

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I am writing this with reference to the article published in The Times of India ,dated 7th December2021, captioned as: Former Shia Waqf Board  chief adopts Hinduism

I am writing this with reference to the article published in The Times of India ,dated 7th December2021, captioned as: Former Shia Waqf Board  chief adopts Hinduism

Religion is a way of connecting to our inner self Inner spiritual way It’s not a thing to flaunt or demonstrate . Its a very personal thing and government has no job to be involved with it in any way. There shouldn’t be any provision of legal conversion. Since there should be nothing official about religion there can’t be anything official about conversion.

Conversion is the adoption of any other religion by the exclusion of other. The goal of all religions is to lead people to the same god . So there is no need for people to change over to another faith. Any faith  or belief can be followed  and practiced without converting or changing one’s religion. In some way , religion is just like an outfit which we can wear according to our choice. Conversion is an act of demeaning religions as well as god.

The People’s Voice Society feels that the term “conversion” should have been removed from all religious practices. People can follow any belief and there is no need to use the term “conversion” for the same. When there would be no relevance of this term, there would be no scope of misuse as well. The anti conversion law and priest certified conversions would automatically become invalid. We need to scrap this law which is a threat to democratic and secular fabric of our great nation.

 Our society is working on this subject for last 6 years. It believes that intercaste/faith/region marriages should be promoted to promote cohesiveness in Society. India needs more and more inter-faith marriages and laws need to facilitate that. We have a firm belief that if India is to be made more cohesive, it needs to take more affirmative steps like,

i) To declare or ask for one’s religion should be made an offence .Religion is a way of    prayers which are as private to any individual as preference of a particular kind of food or color of his shirt etc.

      ii) There should not be any law which talks of conversion, then change of

       religion becomes irrelevant.

iii) Make mandatory to register all marriages online ,with a detailed procedure to avoid frauds ,by   involving close relatives ,friends in the process.

iv) Religion which is like a software if kept out marriage between 2 Indians citizenshelp in homogenising the population thus making a country a peaceful place to live and condusive for economic progress.

       v)Remove the word “Minorities” from the constitution and in whatever

          other laws  it  appears and substitute with other suitable words.

      vi) All future censuses starting from 2021 should not be based on

            Caste/Religion basis.All existing data of caste/religion be destroyed.

vii)Courts should take the lead to make India totally free from religious

      divides by  pronouncing judgements based on common laws rather than

       personal laws . In other words if courts would stop taking cognizance of

       caste /religion of any citizen,  Parliament may follow suit.

   viii)All Mandirs /Masjids /Gurudwaras be termed as PLACE OF

           WORSHIPfor all. Any restriction based on caste/religion from entry be    

            made punishable.

ix) Courts should stop entertaining any petition filed by any so called   

       religious/caste based group.

We need to scrap conversion law which is a threat to democratic and secular fabric of our great nation.

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I am writing this with reference to the article published in The Indian Express, dated 2nd December 2021, captioned as : Bring law for Uniform Civil Code: BJP MP

To

Mr Nishikant Dubey

Senior BJP MP

I am writing this with reference to the article published in The Indian Express, dated 2nd December 2021, captioned as : Bring law for Uniform Civil Code: BJP MP

Our society The People’s Voice seconds your suggestion of bringing in a law for implementing Uniform Civli code. If implemented, it would be considered as a big step towards a cohesive India. The purpose of Uniform Civil Code is to ascertain that each citizen gets equal treatment before the law. It will make us prepare to respect the principal of equality in better manner.

While it’s important to give importance to faith of all people belonging to all religions, it’s equally important from governance point of view that system of law should be religion neutral. Having said that it’s equally important for people to understand that bring religion neutral shouldn’t be misconstrued to be anti religion. In this context it’s very important to understand the importance of Uniform Civil Code.

Practicing one’s faith is an individual choice and right. Protecting the citizens against any wrongdoing is the duty of state and government. Any practice belonging to any religion, if found to be against the spirit of justice, has to be discouraged and in fact needs to be addressed from legal point of view. System can’t let the citizen of the nation suffer just because any religion or faith system approved or justifies it. Any legal system can have only one defined parameter of right and wrong, legal and illegal. These things can’t be left at the mercy of religion and so called religious heads. Therefore our society has been supporting Uniform Civil Code.

We at THE People’s Voice Society are tirelessly working on the proposition to make India a better place to live for the generations which are yet to be borne.  the article  gives rise to a feeling that AIMPLB wishes that certain sections of citizen should always feel “weak”. How it is possible to make all citizens  feel equal if one section is treated as “weak”?

All citizens are at par with each other and authorities should ensure this.

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It’s the tyranny of the opposition: Parliament disruption has almost become the norm. Who is more responsible, BJP or parties opposing it?

Mr pawan Verma

Mr Sushil Modi

I am writing this with reference to the article published in The Times of India, dated 6th December 2021.captioned as : It’s The Tyranny of The Opposition

                                                                              BJP simply doesn’t respect the House

Chaos and disruption in parliament is not a new thing.Direct and indirect losses due to these are huge. Nobody is willing to take the responsibility of smooth functioning since there is absolute lack of sense of accountability. We have been watching the denigration of the multiparty Parliamentary political system. It has reached the lowest possible level now.  Whole country suffers because of this. Everybody is just keen to follow the direction of his/her respective party. In this context it becomes imperative that members of parliament shouldn’t be affiliated to any particular party.

The present political system of Governance has some faults besides issues like the level of commitments and moral ethics of elected representatives. We all need to ponder over it and find solutions to bring in such changes to improve the Governance system. The gravity of the present situation left us with no option other than to introduce new ways of governance.  

We at “The People’s Voice Society”, as anguished citizens with the present system, have been applying our minds to it and prepared a paper on the suggested change. We want to present to you as under;

  • Introduce a new public service commission to facilitate aspiring politicians future-ready. It could be named “The Indian Governance Service “or IGS.  Nurturing accomplished leaders by imparting proper education and training should be the ultimate goal of the institution. It can run on the lines of existing services such as IAS, IPS, IFS.
  •  Establish State-wise Universities to educate the aspirant politicians to start their career in politics. Such Universities could name as”University of Governance”.
  • Universities should have a curriculum to cover all the ministries /constitutional posts.
  • Those aspirants who qualify from the University of Governance should become eligible to fight the election as independent candidates.
  • There should be no political party. All elections should be State-funded and conducted under the aegis of the Election Commission once every five years.
  • Starting from Panchayats, Municipalities, Vidhan Sabha, Lok Sabha, Rajya Sabha, all should have independent members with a Full Term of 5 years.

Vidhan Sabhas/Lok Sabha/Rajya Sabha should have fixed tenure and time table similar to Schools,courts etc.

  • All Ministers in States and centres up to Prime Ministers should get elected by Vidhan Sabha, Lok Sabha, and Rajya Sabha members.
  • All statutory bodies like various Armed forces, Police, Taxation, and various others will independently work under the supervision of Parliament. In case a no-confidence motion against PM and his cabinet are passed, PM and others can be elected from the same Parliament ensuring that the duration of 5 years of Parliament does not get disturbed.In other words ,there should be no provision of dissolution of house.

To make a small beginning, we are proposing two suggestions, following either of these can bring a sea change!!

  1. As soon as an elected candidate takes oath, one should cease to be belonging to any party.
  2. Abolish the provision of party whip from the system.

 We are convinced that Introducing abovesaid system can write a new chapter in the Indian Democracy

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आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय और अन्तरधर्म ही विवाह पूरे समाज का एक मात्र हल है…

हिंदी ईटीवीभारत वेब पोर्टल की खबर को पढ़कर इस पत्र को लिख रहा हूँ । इसकी लिंक भी भेज रहा हूँ – https://www.etvbharat.com/…/bjp-mp…/na20211214141222886

सादर नमस्ते,

राज्य सभा में अंतरजातीय विवाह विषय को लिया गया । भाजपा सांसद ले.जन. डीपी वत्स ने कहा कि खाप पंचायतें जाति तोड़ो समाज जोड़ो का काम कर रही है । उन्होंने इस बात का जिक्र तब किया जब सुप्रीम कोर्ट में खाप पंचायतों पर प्रतिबंध को लेकर जनहित याचिका दायर की जा चुकी । लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी ।खाप पंचायत से कुछ खबरे ऐसी लगातार आती रही है जिसमे महाराष्ट्र हो, राजस्थान हो इन जगहों से दिल को दहला देने वाली खबरे आती रही है । जिसका सोसायटी ने विरोध किया है । लेकिन जो देश हित मे है उसका सोसायटी ने समर्थन भी किया है। वत्स ने कहा कि खाप पंचायतें प्रोगेसिव हो गई हैं । उन्होंने अपना सुझाव भी दिया और कहा कि खाप पंचायतें इन ब्रीडिंग को रोकते हुए क्रॉस ब्रीडिंग को बढ़ावा दे रही है ।अब खाप पंचायत भी अंतरजातीय विवाह का समर्थन कर रही है और इस पर लगातार कार्य हो पूर्णतया अग्रणी सकारात्मक दिशा में है ।रिसर्च विज्ञान ने भी माना है कि क्रॉस ब्रीडिंग से कितना सकारात्मक बदलाव आता है ।

सोसायटी भी यही मानती है और लगातार इस गम्भीर संवेदनशील मुद्दे पर लगातार कार्यरत है और आगे भी कार्य को जारी रखेगी ।खाप पंचायतों के साथ हमारी इस सम्बंध में बहुत वार्ता हुई । हमारी मीटिंग भी होनी थी जो इसका नेतृत्व कर रहे थे कि कैसे हम अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा दे सकते है लेकिन कोरोना के कारण यह मीटिंग नही हो पायी ।हम आपसे आग्रह करते है कि सोसायटी के साथ आपकी मीटिंग हो तो अच्छा रहेगा ।ऐसी खबरे सोसायटी द्वारा जो पहले कार्य किये गए है उसका ही बदलाव है ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 66 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । लोग इस कानून के बारे में जानते तक नही है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को जन जन तक जागरूकता फैलानी चाहिए । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में भी विवाह होना चाहिये । हम सभी को जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिये ।वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बननी चाहिए । जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । वह अंतरजातीय विवाह ही है । सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है ।

आशा है कि आप इस पर विचार करेगे और इस एक्ट को कैसे फैलाया जाये । उस पर कार्य करेगी । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है । आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय और अन्तरधर्म ही विवाह पूरे समाज का एक मात्र हल है ।अंतरजातीय विवाह करने पर जो पैसा अभी दिया जा रहा है उसको बढ़ाया जाना चाहिये । जिससे लोग अधिक से अधिक अंतरजातीय विवाह करे ।आशा है आप इन सभी सुझावों पर ध्यान देंगे और सोसायटी को अपने क्षेत्र में इस विषय पर काम करने का मौका देंगे । जिससे जो भी सोसायटी का अनुभव है वह आपके क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा को लेकर आये और पूरी मानवता के लिये कार्य कर सके ।हमने आपकी राज्यसभा में हुई स्पीच को सुना है जिसमे आपने कहा है कि अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा मिलना चाहिए ।हमारी सोसायटी इस विषय पर पूरे देश मे सभी मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय मंत्री, गृह मंत्री, पीएमओ और अन्य जगह अपनी आवाज उठाती रही है और लगातार पत्र को भेजती रही है ।आशा है आप हमारी सोसायटी की भावनाओ को समझ रहे होंगे ।

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आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्म विवाह पूरे समाज का एक मात्र हल है । सोसायटी के लगातार प्रयास से समाज मे बदलाव दिखने लगे है ।

सादर नमस्ते,जी न्यूज हिंदी वेब पोर्टल और अन्य जगह इस खबर को पढ़कर पत्र लिख रहा हूँ । इस खबर की लिंक – https://www.google.com/…/sushil-modi…/1046814/amp है। सोसायटी के लोगो ने इस खबर को पढ़ा तो अत्यंत प्रशन्नता हुयी कि तेजस्वी यादव ने अंतरजातीय विवाह किया ।

अपनी उस परम्परा को सही करने का एक अग्रणीय कदम है । इससे ज्यादा खुशी तब हुई जब सुशील मोदी ने इस अंतरजातीय विवाह का समर्थन किया और अंतरजातीय विवाह में जो स्कीम है । उसका लाभ उठाने के लिए पूरे प्रदेश को आगे आने के लिए कहा ।राज्य में अंतरजातीय विवाह होना चाहिये इसको लेकर बड़ी सकारात्मक बातें की ।उन्होंने ये भी कहा कि तेजस्वी ने अंतरजातीय विवाह कर बड़ा और अच्छा काम किया है । तेजस्वी ने हिम्मत दिखाई है । तेजस्वी को अंतरजातीय विवाह करने को लेकर बहुत सारी बधाई भी दी । इससे दूसरे लोगो को प्रोत्साहन मिलेगा ।हम तेजस्वी यादव और सुशील मोदी को विशेष तौर पर अपनी सोसायटी के बारे में अवगत कराना चाह रहे है ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 66 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । विहार में लोग इस कानून के बारे में जानते तक नही है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य विहार प्रदेश में जन जन तक जागरूकता फैलानी चाहिए । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में भी विवाह होना चाहिये । हम सभी को जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिये ।वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । वह अंतरजातीय विवाह ही है ।

सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है ।आशा है कि आपकी राज्य सरकार इस पर विचार करेगी और इस एक्ट को पूरे राज्य में कैसे फैलाया जाये उस पर कार्य करेगी । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है । अंतरजातीय विवाह करने पर जो पैसा अभी दिया जा रहा है उसको बढ़ाया जाना चाहिये । जिससे लोग अधिक से अधिक अंतरजातीय विवाह करे ।आशा है आप इन सभी सुझावों पर ध्यान देंगे और सोसायटी को अपने राज्य में इस विषय पर काम करने का मौका देंगे । जिससे जो भी सोसायटी का अनुभव है वह आपके राज्य में सकारात्मक ऊर्जा को लेकर आये और पूरी मानवता के लिये कार्य कर सके ।हम फिर से आप लोगो की सराहना करते है कि आप लोगो ने अंतरजातीय विवाह करने वालो पर सकारात्मक रवैया दिखाया ।

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उत्तर प्रेदश सरकार क्यों अंतरजातीय विवाह पर एक्ट को खत्म करना चाहती है ?

सादर नमस्ते,

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार उत्तर प्रदेश अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन नियमावली 1976 को खत्म करने जा रही है । इस स्कीम के तहत अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को सरकार की ओर से 50 हजार रुपये नगद दिए जाते थे । अब यूपी सरकार इस स्कीम को बंद करने पर विचार कर रही है ।

आप इस राज्य उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया है । आपको जनता ने राज्य को कैसे सकारात्मक तरीके से चलाना है जनता ने अपना वोट का समर्थन दिया लेकिन जनता ने राज्य को तोड़ने के लिए समर्थन नही दिया था ।राज्य इस स्कीम को समाप्त करके जाति, धर्म को बढ़ावा और बढ़ावा मिलेगा । लोगो मे आपस में नफरत पैदा होगी । इस स्कीम को समाप्त करके धर्मांतरण रोका नही जा सकता है । इसका ये बिल्कुल भी सही तरीका नही है । राज्य की छवि खराब होगी । राज्य में हिन्दू मुसलमान ही मुद्दा नही है जिस पर आपकी सरकार काम कर रही है । जो भी लोग ये धर्मांतरण धोखा देकर या जबरजस्ती कर रहे है उनको कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए । वह किसी भी धर्म का हो । सोसायटी इसका सख्त विरोध करती है ।

हमारी सोसायटी सिर्फ इसी एक्ट को अच्छे से पालन किया जाये । इसका समर्थन करती आ रही है और इसमे कैसे और इंसेंटिव बढ़ाया जाये इस पर लगातार कार्य कर रही है ।

हमारी सोसायटी इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 6 वर्षो से लगातार गम्भीरता से पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही है ।

लव जिहाद की चर्चा पिछले कुछ समय से ज्यादा ही खबरों में आ रही है । विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के विषय पर खबरे आ रही है ।
आखिर क्यों अन्तरधर्म में विवाह पर इतनी खबरे अचानक से आने लगी है ?

सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती आ रही है ।
अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से लागू नही करती है । ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । ये सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या नफरत हीन भावना फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । ये उसका आंतरिक मामला है ।
सोसायटी के पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर ध्यान दे । अंतरजातीय विवाह पर जो एक्ट है उसको खत्म करना हल नही होगा ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 66 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य उत्तर प्रदेश में जन जन तक जागरूकता फैलानी चाहिए न कि एक्ट को खत्म किया जाना चाहिए । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में भी विवाह भी होना चाहिये । हम क्यों अन्तरधर्म में विवाह करने से डरते है । आपके कई बयान इस तरीके के ऐसे आये है कि हम सभी हिन्दू है तो जब हम सभी हिन्दू ही है तो आपस में विवाह करने से क्यों डरते है ।

अब प्रश्न उठता है कि जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिये ।

वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । कोई भी आपस मे मतभेद न हो और सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है ।
आशा है कि आपकी राज्य सरकार इस पर विचार करेगी और इस एक्ट को खत्म नही करने पर चिंतन करेगी । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है । ऐसे एक्ट खत्म करने से पहले सोसायटी को लगता है कि फिर से चिंतन, मंथन, अच्छे से विचार विमर्श करे । एक्ट के खत्म होने के बाद लोगो के मन मे दूरिया बढेगी ।
सोसायटी आग्रह करती है कि आपकी राज्य सरकार ऐसे संवेदनशील विषय पर बिना राजनीति किये पूरी मानवता के लिये एक सकारात्मक निर्णय लेगी ।

आशा है आप इन सभी बातों पर ध्यान देंगे और सोसायटी को अपने राज्य में इस विषय पर काम करने का मौका देंगे । जिससे जो भी सोसायटी का अनुभव है वह आपके राज्य में सकारात्मक ऊर्जा को लेकर आये और पूरी मानवता के लिये कार्य करे ।

सोसायटी पुनः विनम्र निवेदन करती है कि राज्य सरकार ऐसे एक्ट को सकारात्मक रवैये से देखे और एक्ट को समाप्त न करे ।

इस खबर को देखते हुए पत्र लिखा है । जिसकी लिंक – https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/story/uttar-pradesh-govt-to-scrap-interfaith-marriage-incentive-scheme-1170837-2020-12-02

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एक बेटी को अंतरजातीय विवाह करने पर उसके पिता ने ही रेप करके मार डाला । क्यों …सोचे…? पिता के साथ पूरा समाज जिम्मेदार है ।

विषय :- एक बेटी को अंतरजातीय विवाह करने पर उसके पिता ने ही रेप करके मार डाला । क्यों …सोचे…?
पिता के साथ पूरा समाज जिम्मेदार है ।

सादर नमस्ते,

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल 21 नबंबर के सारे अखबार विशेषकर अंग्रेजी के हिंदुस्तान टाइम्स और न्यूज चैनल में इस खबर को पढ़कर पत्र लिख रहे है ।
इस पत्र को लिखते हुये उंगलियाँ कांप रही है कि क्या एक पिता की सोच इतने नीचे गिर सकती है कि अपनी बेटी के साथ ही बलात्कार करके मार दिया ।
सिर्फ उसके बेटी की इतनी गलती थी कि उसने अंतरजातीय विवाह किया था ।
इस पिता ने आज दुनिया के सभी पिताओं का सिर शर्म से झुका दिया है ।
पिता ने पुलिस पूछताछ में अपना गुनाह कबूल करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं हैं जो हमारी नजरों पर जमीं धूल साफ करने के लिए काफी है । पिता ने कहा कि बेटी के दूसरी जाति में शादी कर लेने के बाद हमारे खानदान के लोगों ने हमसे रिश्ता तोड़ लिया था । हमें किसी भी शादी में आमंत्रण नहीं दिया जाता था । हमें कोई पूछता नहीं था । लोगों ने हमसे दूरी बना ली थी । मुझे ताने मारे जाते थे । हमें शर्मिंदा होना पड़ता था । ये सब बातें इस पिता का अहंकार और झूठी शान शौकत दिखाती है ।

इस पिता को इतना बड़ा गुनाह करने के लिए सिर्फ ये पिता ही जिम्मेदार नही है पूरा समाज जिम्मेदार है क्यों कि अंतरजातीय विवाह करने पर लोगो की सोच बिल्कुल ही छोटी है ।
आज समाज किस दिशा में जा रहा है ।
हमारी सोसायटी हमेशा ऐसे मुद्दे देश, समाज के सामने सरकार के पास लेकर जाती है कि आज अंतरजातीय विवाह कितना जरूरी हो गया है ।
यदि समाज मे विवाह को आसानी से मान्यता मिल गयी होती तो ऐसी खबरें देखने को कभी नही मिलती

आज अभी भी जातिगत मुद्दे को लेकर वर्तमान में ऐसी सोच दिखाती है कि हम किस पीछे की सदी में जी रहे है । हम जातिगत समस्या से कब निकलेंगे ?

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से लागू नही करती है । ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी इस तरीक़े के मामले आते है । लोगो की सोच को बताते है कि अंतरजातीय विवाह लोग स्वीकार नही कर रहे है ।
सोसायटी के पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर ध्यान दे –
हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 66 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य में जागरूकता फैलाये । हर गावँ तक इस एक्ट को पहुंचना चाहिए । सरकार इस तरीके से प्लानिग करे । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये ।
सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह भी होना चाहिये ।

सोसायटी को लगता है कि सबसे पहले आपस मे अंतरजातीय विवाह होना चाहिए फिर अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह भी शामिल होना चाहिये ।

सोसायटी पुनः विनम्र निवेदन करती है कि आपकी राज्य सरकार अंतरजातीय विवाह का जो एक्ट है उस पर कार्य करेगी ।
ये जो घटना घटी है ये शर्मसार करती है । आगे ऐसी घटनाएं न हो जल्द से जल्द अंतरजातीय विवाह पर कार्य करे।

देश ऐसा बन जाना चाहिए कि अंतरजातीय विवाह सबके लिये सामान्य हो जाना चाहिये । समाज की ऐसी सोच हो जानी चाहिये ।

इस पत्र को विशेषकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्य के हर मुख्यमंत्री को भेज रहे है कि अपने राज्य में भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो इस पर कार्य करे और राज्य में अंतरजातीय विवाह पर जो एक्ट है उस पर गम्भीरता से सोचे और जनजन तक जागरूकता इस एक्ट को फैलाये ।
हम कब तक ऐसी खबरें अखवार, टीवी की हेड लाइन पर देखना चाहते है ? सोचे…

https://www.hindustantimes.com/india-news/murder-suicide-no-regrets-tale-of-hate-crime-in-madhya-pradesh-101637428526915.html

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