हमारी सोसायटी स्पेशल मैरिज एक्ट का समर्थन करती है लेकिन जो बीजेपी के डॉक्टर वमनाचार्य जी कह रहे है उनका भी कहना सही मानती है कि इस पर भी सोचना होगा कि यदि कोई पहले से शादीशुदा है तो उसको कैसे पता करेंगे ।उस डिवेट की लिंक है ।

कोर्ट को जो पहले पत्र लिखा था उसकी प्रशंसा तो करते है । वह पत्र भी साथ मे है …

सादर नमस्ते,सभी अखवारों, न्यूज वेव पोर्टल और अन्य खबरो के स्रोतों के माध्यम से पता चला है कि स्पेशल मैरिज एक्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है जिसमें कहा गया है कि 30 दिन के पूर्व नोटिस की बाध्यता खत्म हो गयी है । इससे 2 धर्मों में जो विवाह कर रहे है उनके लिये शुभ सूचना है और आराम से बिना किसी परेशानी के विवाह कर सकते है ।यह बहुत ही बड़ा और समाज मानव के हित में सकारात्मक निर्णय है । सोसायटी इस पर आपको बहुत बधाई और शुभकामनाएं देती है कि आपने उस समय ये निर्णय लिया । जिस समय उत्तर प्रदेश सरकार 2 धर्मो के विवाह को ऐसे देख रही है जैसे कोई बहुत बड़ा अपराध हो रहा है । अभी हाल ही में “उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून, 2020 जो बना है । वह देश को एकजुट करने के लिये सही नही है । इससे तो लोगों में आपस मे नफरत पैदा होगी । आपस में धर्मो की दीवारें खड़ी हो जायेगी । लोगो को अहसास होता रहेगा कि वह किसी धर्म से सम्बंध रखते है । ऐसे कानून का सोसायटी सख्त विरोध करती है । इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था कि इस कानून पर फिर से विचार करे और सभी अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है कि ऐसे कानुन अपने राज्य में न बनाये जिससे देश आपस मे जुड़ने की बजाय, बटने लग जाये । यह एक बहुत ही गम्भीर विषय है ।भविष्य में ऐसा न हो इसलिये सोसायटी का विशेष आग्रह है कि आप न्यायालय की तरफ से राज्य में ऐसे कदम पर साथ न दे जो मानवीय हित मे नही है । हमारी सोसायटी इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 6 वर्षो से लगातार गम्भीरता से पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही है । लव जिहाद की चर्चा पिछले कुछ समय से लगातार होती है । विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के विषय पर खबरे आती रहती है ।सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती आ रही है । इन सबका हल क्या होगा, जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है । ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या नफरत फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । लोग क्यों बदलना चाहते है धर्म। ये ठीक नही है ।सोसायटी के पास इन सबका हल है । हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को उत्तर प्रदेश में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है । हम सभी अंदर से एक ही है । अब प्रश्न उठता है कि जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिए । पहले क्या हुआ । किसने कितना अपराध, जुर्म किया है इस पर बदला लेने से अच्छा है कि हम वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । कोई भी आपस मे मतभेद न हो और सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है और देश को एक कर सकता है । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है ।100 से अधिक पूर्व आई ए एस अधिकारियों ने भी उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है कि जो उत्तर प्रदेश में कानून बनाया गया है वह वापिस लिया जाये । आई ए एस वर्ग देश को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि इन सभी को भी इस पर सोचना पड़ रहा है तो कुछ तो इस कानून में गड़बड़ है । जिस पर सोसायटी को लगता है कि फिर से चिंतन, मंथन, अच्छे से विचार विमर्श होना चाहिये ।सोसायटी आग्रह करती है कि न्यायालय ऐसे संवेदनशील विषयो पर अच्छे कदम उठाती रहेगी ।सोसायटी एक बार फिर से न्यायालय की तरफ से जो निर्णय आया है उसकी प्रशंसा करती है ।

हमारी सोसायटी स्पेशल मैरिज एक्ट का समर्थन करती है लेकिन जो बीजेपी के डॉक्टर वमनाचार्य जी कह रहे है उनका भी कहना सही मानती है कि इस पर भी सोचना होगा कि यदि कोई पहले से शादीशुदा है तो उसको कैसे पता करेंगे ।उस डिवेट की लिंक यही है ।

https://www.ndtv.com/…/no-need-to-show-notice-

for…https://www.ndtv.com/…/interfaith-marriage-end-to…

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अलग धर्म में शादी करने वालों के लिए हाईकोर्ट की तरफ से 30 दिन के पूर्व नोटिस की बाध्यता खत्म करने पर सोसायटी इस सराहनीय कदम की प्रशंसा करती है ।

सेवा में,                                                                                                            16/01/2021

सम्मानीय विवेक चौधरी,

मुख्य न्यायाधीश,

इलाहाबाद,

उत्तर प्रदेश

विषय :- अलग धर्म में शादी करने वालों के लिए हाईकोर्ट की तरफ से 30 दिन के पूर्व नोटिस की बाध्यता खत्म करने पर सोसायटी इस सराहनीय कदम की प्रशंसा करती है ।

सादर नमस्ते,

सभी अखवारों, न्यूज वेव पोर्टल और अन्य खबरो के स्रोतों के माध्यम से पता चला है कि स्पेशल मैरिज एक्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है जिसमें कहा गया है कि 30 दिन के पूर्व नोटिस की बाध्यता खत्म हो गयी है । इससे 2 धर्मों में जो विवाह कर रहे है उनके लिये शुभ सूचना है और आराम से बिना किसी परेशानी के विवाह कर सकते है ।

यह बहुत ही बड़ा और समाज मानव के हित में सकारात्मक निर्णय है ।  सोसायटी इस पर आपको बहुत बधाई और शुभकामनाएं देती है कि आपने उस समय ये निर्णय लिया । जिस समय उत्तर प्रदेश सरकार 2 धर्मो के विवाह को ऐसे देख रही है जैसे कोई बहुत बड़ा अपराध हो रहा है । अभी हाल ही में “उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून, 2020 जो बना है । वह देश को एकजुट करने के लिये सही नही है । इससे तो लोगों में आपस मे नफरत पैदा होगी । आपस में धर्मो की दीवारें खड़ी हो जायेगी । लोगो को अहसास होता रहेगा कि वह किसी धर्म से सम्बंध रखते है । ऐसे कानून का सोसायटी सख्त विरोध करती है । इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था कि इस कानून पर फिर से विचार करे और सभी अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है कि ऐसे कानुन अपने राज्य में न बनाये जिससे देश आपस मे जुड़ने की बजाय, बटने लग जाये । यह एक बहुत ही गम्भीर विषय है ।

भविष्य में ऐसा न हो इसलिये सोसायटी का विशेष आग्रह है कि आप न्यायालय की तरफ से राज्य में ऐसे कदम पर साथ न दे जो मानवीय हित मे नही है । हमारी सोसायटी इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 6 वर्षो से लगातार गम्भीरता से पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही है । लव जिहाद की चर्चा पिछले कुछ समय से लगातार होती है । विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के विषय पर खबरे आती रहती है ।

सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती आ रही है । इन सबका हल क्या होगा, जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है । ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या नफरत फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । लोग क्यों बदलना चाहते है धर्म।  ये ठीक नही है ।

सोसायटी के पास इन सबका हल है । हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को उत्तर प्रदेश में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है । हम सभी अंदर से एक ही है । अब प्रश्न उठता है कि जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिए । पहले क्या हुआ । किसने कितना अपराध, जुर्म किया है इस पर बदला लेने से अच्छा है कि हम वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । कोई भी आपस मे मतभेद न हो और  सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है और देश को एक कर सकता है । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है ।

100 से अधिक पूर्व आई ए एस अधिकारियों ने भी उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है कि जो उत्तर प्रदेश में कानून बनाया गया है वह वापिस लिया जाये । आई ए एस वर्ग देश को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि इन सभी को भी इस पर सोचना पड़ रहा है तो कुछ तो इस कानून में गड़बड़ है । जिस पर सोसायटी को लगता है कि फिर से चिंतन, मंथन, अच्छे से विचार विमर्श होना चाहिये ।

सोसायटी आग्रह करती है कि न्यायालय ऐसे संवेदनशील विषयो पर अच्छे कदम उठाती रहेगी ।

सोसायटी एक बार फिर से न्यायालय की तरफ से जो निर्णय आया है उसकी प्रशंसा करती है ।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

“सचिव”

“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”
“नई दिल्ली”

फोन : +91-124-416-4000

मोबाइल : +91-92055-43360

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Blog :- https://tpvblog.wordpress.com/

News Link : –

https://www.india.com/hindi-news/uttar-pradesh/marriage-will-be-possible-within-a-month-under-the-special-marriage-act-even-without-putting-photos-in-the-notice-board-4329806/

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सोसायटी का विशेष आग्रह है कि उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश की तरह लव जिहाद पर अपने राज्य में ऐसे कानून नही बनने दे

सादर नमस्ते,                                                                                                    09/01/2021                      

विषय :- सोसायटी का विशेष आग्रह है कि उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश की तरह लव जिहाद पर अपने राज्य में ऐसे कानून नही बनने दे

“उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून, 2020 जो बना है । वह देश को एकजुट करने के लिये सही नही है । इससे तो लोगों में आपस मे नफरत पैदा होगी । आपस में धर्मो की दीवारें खड़ी हो जायेगी । लोगो को अहसास होता रहेगा कि वह किसी धर्म से सम्बंध रखते है । ऐसे कानून का सोसायटी सख्त विरोध करती है ।

भविष्य में ऐसा हो इसलिये सोसायटी का विशेष आग्रह है कि अपने राज्य में ऐसे कानून नही बनने दे

हमारी सोसायटी इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 6 वर्षो से लगातार गम्भीरता से पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही है । लव जिहाद की चर्चा पिछले कुछ समय से लगातार होती है । विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के विषय पर खबरे आती रहती है । सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती आ रही है । इन सबका हल क्या होगा, जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है । ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या नफरत फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । लोग क्यों बदलना चाहते है धर्म।  ये ठीक नही है । सोसायटी के पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर ध्यान दे ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य उत्तर प्रदेश में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है । हम सभी अंदर से एक ही है । अब प्रश्न उठता है कि जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिए । पहले क्या हुआ । किसने कितना अपराध, जुर्म किया है इस पर बदला लेने से अच्छा है कि हम वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । कोई भी आपस मे मतभेद न हो और  सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है ।

आशा है कि राज्य सरकार इस पर विचार करेगी । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है । अभी हाल ही में 100 से अधिक पूर्व आई ए एस अधिकारियों ने भी उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है कि जो उत्तर प्रदेश में कानून बनाया गया है वह वापिस लिया जाये । आई ए एस वर्ग देश को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि इन सभी को भी इस पर सोचना पड़ रहा है तो कुछ तो इस कानून में गड़बड़ है । जिस पर सोसायटी को लगता है कि फिर से चिंतन, मंथन, अच्छे से विचार विमर्श होना चाहिये ।

सोसायटी आग्रह करती है कि राज्य सरकार ऐसे संवेदनशील विषयो पर बिना राजनीति के मानव सेवा को देखते हुये कदम उठायेगी जिससे पूरी मानवता के लिये एक सकारात्मक निर्णय हो और सभी मे एक दूसरे के प्रति जाति, क्षेत्र, धर्म आकर भाईचारा का ख्याल आये   ऐसा सोसायटी सोचती है ।

आशा है आप इन सभी बातों पर ध्यान देंगे और सोसायटी को अपने राज्य में इस विषय पर काम करने का मौका देंगे । जिससे सोसायटी का अनुभव राज्य में एक सकारात्मक ऊर्जा को लेकर आये और पूरी मानवता के लिये कार्य होता रहे ।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

“सचिव”

“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”
“नई दिल्ली”

फोन : +91-124-416-4000

मोबाइल : +91-92055-43360

Website :- http://thepeoplesvoice.in/

Blog :- https://tpvblog.wordpress.com/

sent letter to all cm

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सोसायटी जबरजस्ती धर्म परिवर्तन करने वाले असामाजिक तत्वों का सख्त विरोध करती है ।

सेवा में,                                                                                             02/01/2021

मुख्य सम्पादक,

शशि शेखर,

हिन्दुस्तान,

कस्तूरबा गांधी मार्ग,

नई दिल्ली, 110001

सादर नमस्ते,

विषय :- सोसायटी जबरजस्ती धर्म परिवर्तन करने वाले असामाजिक तत्वों का सख्त विरोध करती है । इस लेख को वेव पोर्टल में जगह दे ।

2 जनवरी 2021 हिन्दुस्तान वेव पोर्टल में ख़बर है कि “तमंचे के दम पर धर्मांतरण की कोशिश” जिसकी लिंक भी भेज रहा हूँ https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/story-love-jihad-attempt-of-conversion-on-gun-point-criminals-displayed-weapons-in-front-of-girl-student-after-she-complained-in-barely-3719731.html

समाज मे ऐसे असामाजिक तत्व जो जबरजस्ती धर्म परिवर्तन कर रहे है । ऐसे लोगों के प्रति सख्त कार्यवाही होनी चाहिये । हमारी सोसायटी देश को एक करने के लिए कार्य कर रही है कि

अंतरजातीय विवाह, अन्तरक्षेत्रीय विवाह और अंतर धर्मो में विवाह होना चाहिये । बिना धर्म बदले भी विवाह हो सकता है जो जिस धर्म को मानता है उसका पालन करे ।

सोसायटी ऐसे असंवेदनशील, असामाजिक तत्व घृणा फैलाने वाले और जबरजस्ती विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन करने वालो का सख्ती से विरोध करती है, वह कोई भी किसी भी धर्म का पालन करता हो ।

लव जिहाद की चर्चा  लगातार होती है । सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती है ।

सोसायटी इस विषय पर कार्य कर रही है कि इन सबका हल क्या हो जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।

सोसायटी के पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर ध्यान दे ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य उत्तर प्रदेश में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है । हम सभी अंदर से एक ही है । अब प्रश्न उठता है कि जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिए ।  हम वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । कोई भी आपस मे मतभेद न हो और  सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है ।

आशा है कि आप अपने पोर्टल में हमारे इस लेख को जगह देंगे जिससे समाज एक होने में मदद मिले ।

धन्यवाद

taken action

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” उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून 2020 से सम्बंधित “

नमस्ते,                                                                                                           30/12/2020

उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून, 2020 जो बना है उसमें कोई सकारात्मक, देश हित मे पूरी मानवता को देखते हुये कानून नही दिख रहा है उसमें लव जिहाद तथा सामूहिक धर्म परिवर्तन पर सरकार से सख्त कार्यवाही की  जायेगी और दस वर्ष की सजा का भी प्रावधान है

हमारी सोसायटी इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 6 वर्षो से लगातार गम्भीरता से पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही है

आज ही मध्यप्रदेश में भी इसी तरीके का लगभग कानून बनाया गया है देश इससे एक नही होगा और 2 धर्मो के बीच नफरत पैदा हो रही है एक धर्म का युवक या युवती दूसरे धर्म के युवक या युवती से कभी भी विवाह करने की नही सोचेगा यदि वह सही नियत और सच्चे इरादे से विवाह करना भी चाहे तब भी विवाह नही करेगा

सोसायटी ऐसे असंवेदनशील, असामाजिक तत्व घृणा फैलाने वाले और जबरजस्ती विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन करने वालो का सख्ती से विरोध करती है, वह कोई भी किसी भी धर्म का पालन करता हो

लव जिहाद की चर्चा  लगातार होती है सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती है

सोसायटी इस विषय पर कार्य कर रही है कि इन सबका हल क्या हो जिससे सब कुछ ठीक हो जाये कब तक ये सब चलता रहेगा

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है ?  ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये ये जितने भी मामले आते है सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या नफरत फैलाने वाले होते है वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने लोग क्यों बदलना चाहते है धर्म।  ये ठीक नही है

सोसायटी के पास इन सबका हल है कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है उस पर ध्यान दे

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है सामान्य जनता को इसका पता ही नही है भारत सरकार द्वारा कानूनप्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955″ में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था आज लगभग 64 साल होने को है लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य उत्तर प्रदेश में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है हम सभी अंदर से एक ही है अब प्रश्न उठता है कि जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है उससे बाहर आना चाहिए पहले क्या हुआ किसने कितना अपराध, जुर्म किया है इस पर बदला लेने से अच्छा है कि हम वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो कोई भी आपस मे मतभेद हो और  सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है

आशा है कि राज्य सरकार इस पर विचार करेगी

हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है

अभी हाल ही में 100 से अधिक पूर्व आई एस अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है कि ये कानून वापिस लिया जाये आई एस वर्ग देश को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि इन सभी को भी इस पर सोचना पड़ रहा है तो कुछ तो इस कानून में गड़बड़ है जिस पर सोसायटी को लगता है कि फिर से चिंतन, मंथन, अच्छे से विचार विमर्श होना चाहिये

सोसायटी आग्रह करती है कि इस पर जरूर सरकार फिर से विचार करके जो सही है वह करेगी  ।

action taken such type of News

https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/story/104-indian-retired-bureaucrats-have-written-to-up-cm-yogi-adityanath-raising-concerns-over-its-love-jihad-policy-1184794-2020-12-30

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जब तक मनुष्य इन जाति, क्षेत्र, सम्प्रदाय, धर्म से बाहर नही निकलेगा तब तक व्यक्ति, समाज, देश आगे नही बढ़ सकता है । हम कितना भी विकास कर ले ।

नमस्ते,

द पीपुल्स वॉइस सोसायटी का मुख्य उद्देश्य समाज को समाज बनाना है । अभी समाज बना ही नही है । व्यक्ति से समाज बनता है लेकिन सही मायने में व्यक्ति ही व्यक्ति नही है । हर मनुष्य को स्वतंत्र जीने का अधिकार है लेकिन क्या मनुष्य सच मे स्वतंत्र जी रहा है । मनुष्य तो सारे रीति रिवाज, जाति, सम्प्रदाय, धर्म के बंधन में जीता है । वह अपनी चेतना के विकास में जी ही नही रहा है । 

सोसायटी किसी रीति-रिवाज, जाति, धर्म के विरोध में नही है । लेकिन वह समाज के द्वारा जबरजस्ती उस पर न डाला गया हो । 

अब यदि इतनी सरल, सहज कि कोई मूर्ति पूजा करता है मंदिर जाता है तो उसको पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए । कोई मसिजद जाता है तो जाना चाहिए । कोई चर्च, गुरुद्वारा, किसी भी सम्प्रदाय धर्म को मानता है तो उसका कोई विरोध नही होना चाहिए । 

आज हमारे समाज की अधिकतर ऊर्जा इन सबमे लगी रहती है कि दूसरा व्यक्ति वही माने जो वह मानता है ये अहंकार का एक बहुत सूक्ष्म रूप है । हम क्यों दूसरे से वही मनवाना चाह रहे है जो हम मानते है ।

कितने विवाह होते है जो अंतरजातीय होते है । समाज उनको जीने नही देता है और अन्तरधर्मो में विवाह कोई कर ले तो मानो एक अपराध हो गया है । लोग अपनी सोच बदलना नही चाहते है । क्यों कि समाज का एक बड़ा हिस्सा सब अपने जाति, सम्प्रदाय, धर्म को बचाना चाहते है । 

जब तक मनुष्य इन जाति, क्षेत्र, सम्प्रदाय, धर्म से बाहर नही निकलेगा तब तक व्यक्ति, समाज, देश आगे नही बढ़ सकता है । हम कितना भी विकास कर ले । 

भौतिक स्तर पर विकास से कुछ नही होगा, जब तक मानसिक स्तर पर विकास नही होगा । 

सोसायटी समाज का पूर्ण विकास करना चाहती है जो कि एक दिन होकर रहेगा । 

लोग अभी शायद हमारी विचारधारा को कम समझ रहे है लेकिन एक दिन सभी समझेगे कि सोसायटी क्यों इस विषय पर काम कर रही है । क्यों कि सोसायटी पूर्ण विकास करने पर विश्वास करती है और लगातार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है ।

धन्यवाद

द पीपुल्स वॉइस सोसायटी

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क्या देश को एक करने के लिए ये ठीक है । कितने धर्म बनाओगे । कब तक धर्म बनाओगे । अभी क्या जाति, धर्म कम है । सब अपनी अपनी अलग रेखा बना रहे है

सेवा में,                                                                                             21/11/2020

सम्मानीय हेमन्त सोरेन,

मुख्यमंत्री,

झारखंड

सादर नमस्ते,

18 नबम्बर 2020 बीबीसी न्यूज पोर्टल में खबर छपी है कि – क्या आदिवासियों को मिल पायेगा उनका अलग धर्म कोड, झारखंड का प्रस्ताव अब मोदी सरकार के पास ।

झारखंड विधानसभा ने “सरना आदिवासी धर्म कोड विल” को सर्वसम्मति से पास कर दिया है । इसमें आदिवासियों के लिये अलग धर्म कोड का प्रस्ताव है ।

क्या देश को एक करने के लिए ये ठीक है कितने धर्म बनाओगे कब तक धर्म बनाओगे अभी क्या जाति, धर्म कम है सब अपनी अपनी अलग रेखा बना रहे है सरकार उसका समर्थन करती है शायद वोट बैंक एक कारण हो सकता है । कब तक देश को बांटते रहोगे ।

हमारी सोसायटी ऐसे सभी धर्म कोड का सख्ती से विरोध करती है । जो इनका समर्थन करती है । अपना धर्म कोड अलग रखकर क्यों अलग होना चाहते है ।

ऐसे देश कभी नही बदलेगा । सरकारे बदलती रहेगी।  राजनीति बदलती रहेगी । लेकिन लोग वही के वही रहेंगे । हमारी सोसायटी इन सबका जड़ से हल खोज चुकी है । यदि सरकार ने इस पर सही कार्यवाही की तो जल्द बहुत बड़ा सकारात्मक परिणाम आयेगा ।

हम आपका ध्यान इस एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानूनप्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955″ में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था आज लगभग 64 साल होने को है लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य में जागरूकता फैलाने में मदद करे । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर सोसायटी कार्य कर रही है ।

हम सभी अंदर से एक है ये जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी जाती है । उससे बाहर आना चाहिए । हम सब आपस मे विवाह करेंगे तो ये जाति, धर्म मे अभी मतभेद दिखते है वह भविष्य में पूरी तरह समाप्त हो जायेंगे । आज हमने अपनी सोच नही बदली है तो देश को इसका बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है

आशा है हमारी विचारधारा को समझेंगे और इस पर जल्द ही कोई कार्यवाही करेंगे ।

धन्यवाद

भवदीय

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पृथ्वी मानकतला

“सचिव”

“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”
“नई दिल्ली”

फोन : +91-124-416-4000

मोबाइल : +91-92055-43360

http://thepeoplesvoice.in/

taken action – https://www.bbc.com/hindi/india-54975388

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Increasing Religious and Cultural Hostility a threat to India’s Growth & Development

The recent eruption of controversy surrounding the Tanishq advertisement depicting an inter faith marriage has brought into sharp focus the increasingly religious intolerance and hostility permeating Indian Society today. What was meant as a show of Indian pluralism and unity unfortunately descended into utter pandemonium, bigotry and downright hatred.

The People’s Voice Society was set up with the goal of promoting inter caste and inter religious marriages in the country, in order to facilitate cultural integration which would serve as a means to long lasting peace and tranquillity in society. This, in turn, would help propel India as a developed economy, with an educated young, healthy and vibrant society, devoid of class divisions, peaceful and progressive. We have seen that absence of cultural inclusiveness has led to riots in the past, the costs of which have set back the nation a great deal. Acts like the Protection of Civil Rights Act and the Special Marriages Act have given legal footing and encouragement to such marriages, and our Society is committed to raising awareness about these Acts across the country.

Returning to the controversy, the furore caused by the advertisement has only served to be symptomatic of the larger malaise that afflicts our society today. Religious divisions are heightened in our country today, and the role played by the media can be in no way overstated. In recent times, both print and digital media have increasingly started reporting news with a communal lens, flashing provocative headlines, and fanned flames of discontent between communities through divisive reporting and pitting one community against another in utilizing public resources.

For our nation to truly progress, we cannot be held down by religious, casteist or other man made divisions which only hamper our growth and blind us with loathing and mistrust for those supposed be “different from us”. This is despite the fact that no one gets stamped with any religion during birth, nor have any identifiable markers making them different from us.

It is only natural that as the economy advances and the Indian middle class expands, more and more young Indians would acquire education, knowledge, newer experiences and come to hold liberal views. More and more young women and men would study and work together. Some of them may fall in love and marry even as they may continue to practice their own religion individually. In a democratic and secular nation, there is absolutely no scope for targeting or victimizing those choosing to marry outside of their religion, and such actions cannot be normalized by the community at large.

The leading role in bringing about this change must be played by the media, which is the most powerful tool with the most penetration across the country. It has become very depressing to even open the newspapers these days as the headline of majority of articles starts with Caste, Religion or such other dividing factors of the society. We believe very strongly if the media stops highlighting the caste/ religion of the news subjects in the headlines, it will certainly have positive impact in our society. It is very crucial for the long term future of the country that all of us should come out of the poison that has spread in people related to man-made straitjackets like caste and religion. Only then can we become a civilized, positive & energetic society.

At the end of the day, human beings have always been serving human beings; this after all is our moral responsibility. This is how society operates.

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Caste based reservation: A Boon or Bane ?

Reservations have always been a contentious issue in India, especially after the implementation of the Mandal Commission recommendations which advocated that 27% of the jobs under the Central government and public sector undertakings should be reserved for Other Backward Classes (OBCs). The debate over what the basis of reservations should be has been a particularly polarising point in public discourse, over the years.

We at The People’s Voice Society believe that caste or religion based reservation and its implementation is against national unity and damaging to the cultural fabric of the nation. Granting quotas by caste, it can be argued, escalates caste-based divisiveness and encourage sub-nationalism by allowing them to be articulated in electoral politics. Caste divisions are causing hatred among communities which is only increasing due to reservations. Many communities in several states of India are fighting to give them reservations and as a consequence, people are increasingly associating with their caste.

Unfortunately, politicians in our country have used reservations for their vote bank politics. Hence, caste reservations have further perpetuated the caste system, instead of helping in destroying it. Caste is a feudal institution, which has to be destroyed if India is to progress, but reservations further entrenches it.  Reservation in its current form has introduced a form of identity politics that makes caste visible, when the goal ought to be the eradication of caste. Making caste, or religion, a topic of discussion is “votebank politics” that divides Indians. This view presents the policy of reservation as a paradox: How can caste-sensitive reservation policies fight caste-sensitivity?

Caste or religion based reservations also lead to an inefficient bureaucracy. Any reservation based on social or historical criteria affects efficiency adversely, as merit is not the primary indicator based on which government servants are being selected.

The segregation of Indian society based on caste and religion is also a threat to democracy. Democracy is a form of self-governance among political equals, and mistrust between caste groups and a lack of understanding of one another threaten this practice.

Compared to previous times, the policies of liberalisation and modernisation have weakened the hold of caste, and caste has been replaced by other markers of identity, such as class, which is the dominant feature through which one understands Indian society in today’s day and age.

Support to the needy and economically vulnerable is a must in society. However, using a communal lens does not ensure that they are adequately served. One of the primary criticisms against reservations has been that they should not be caste-based, and should be based on other indicators such as economic status instead.

The People’s Voice Society envisions India advancing towards becoming a society devoid of divisions based on caste, creed and religion, where no person is discriminated upon based on his ancestry. For this to be realized, we implore upon the Legislature and Judiciary of the nation to abolish the current system of caste based reservation, in order to preserve the national unity and integrity of this great nation.

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तमिलनाडु सरकार की तरह अंतरजातीय विवाह पर सभी राज्यों में 24 घण्टे सेवा चालू हो …


सादर नमस्ते, 07.11.2020


आज अंतरजातीय विवाह को लेकर लोगो की सोच बदल रही है । युवा अब जातिगत भेदभाव से दूर हो रहा है लेकिन पुरानी परम्पराये रीति रिवाज के कारण अभी भी युवा वर्ग को अंतरजातीय विवाह में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।
हमारी सोसायटी अंतरजातीय विवाह पर लगातार काम कर रही है । हर राज्य अपने तरीके से इस विषय पर काम कर रहा है लेकिन इस विषय की गम्भीरता को देखते हुये राज्य सरकारों को बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है और अपने अपने स्तर पर इस पर जागरूकता करने की भी जरूरत है जिससे लोग विवाह के लिये आगे आये ।
अभी 1 साल पहले तमिलनाडु सरकार ने अंतरजातीय जोड़ो के लिए 24 घण्टे की हेल्पलाइन सेवा शुरू की थी जो कि बहुत ज्यादा सकारात्मक है । जिसकी लिंक भी आपको भेज रहा हूँ । ये हर राज्य को करने की जरूरत है । जिससे लोगो मे अन्तरजातीय विवाह को लेकर उत्साह बढ़ेगा । तमिलनाडु सरकार का ये सराहनीय कदम है ।
हमारी सोसायटी केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एन्ड एम्पावरमेंट के अंतर्गत डॉक्टर अम्बेडकर फाउंडेशन जो अंतरजातीय विवाह पर लगातार कार्य कर रही है । उससे भी आग्रह करती है कि केंद्र सरकार भी इसी तरीके की 24 घण्टे सेवा अंतरजातीय जोड़ो के लिए होनी चाहिए ।
हर राज्य तमिलनाडु सरकार की तरह ऐसा कदम उठाये । हम तमिलनाडु सरकार के इस कदम को हर राज्य तक पहुंचा रहे है । आपसे भी आशा है कि आप अपने स्तर से अपने यहाँ ऐसी सेवा चालू करेंगे और अन्तरजातीय विवाह को अधिक से अधिक बढ़ावा देंगे ।
हम आपका ध्यान इस एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस एक्ट को अलग अलग राज्यो में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है । हम सभी अंदर से एक है तो जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिए
आशा है आप इस पर जल्द से जल्द कार्यवाही करेंगे ।
Kind Regards

Prithvi Manaktala
General Secretary

New Delhi
Tel: +91-124-245-0090
Mob: +91-92055-43360
Website:- http://www.thepeoplesvoice.in
Blog: https://tpvblog.wordpress.com

action taken on below news articles:

https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/tn-government-sets-up-24-hour-helpline-for-inter-caste-couples/article24469909.ece

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