Shocked by Daughter's Inter-caste Love Marriage, Three of Maharashtra Family Commit Suicide – We should all support interctate marriage to change the Society's mindset towards such alliances which will eventually help in making India cohesive Society.

IANS Updated:February 11, 2020, 9:39 PM IST

Shocked by Daughter’s Inter-caste Love Marriage, Three of Maharashtra Family Commit Suicide.

While the girl, a schoolteacher, belongs to an OBC caste, the boy belongs to a Scheduled Caste working for a private company.

The newly-wedded couple has been admitted to a local hospital for treatment. Their condition is reported to be stable, she said.

It all started on Saturday when the girl — Pranali Wargantivar (24) — suddenly left home without informing anybody and went straight to Markanda village in the district and got married to her beau at a local Shiv Temple on Sunday.

While the girl, a schoolteacher, belongs to an OBC caste, the boy belongs to a Scheduled Caste working for a private company. The girl’s family was strongly opposed to the ‘inter-caste’ alliance.

When the Wargantivar family — Ravindra (52), Vaishali (45) and their son Sairam (20) — learnt of Pranali’s marriage on Monday, they first stopped eating, then left their home to go for a stroll. Around a kilometre away, they came across a farm-well and jumped into it and ended their lives.

Prior to committing suicide, they informed the owner of their rented house of their intentions and disconnected the phone before he could attempt to dissuade them from taking the extreme step.

Earlier, the Wargantivars attempted to lodge a police complaint against their proposed inter-caste marriage, but both the boy and girl were adults, so no cognizance was taken.

Their bodies were recovered on Monday afternoon.

As the shocking news of the triple suicide reached the just-married couple, they consumed some chemicals and jumped into the Pohar River near Markanda in Chamorshi sub-district, but were saved in the nick of time by a police team.

https://www.news18.com/news/india/shocked-by-daughters-inter-caste-love-marriage-three-of-maharashtra-family-commit-suicide-2497833.html

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Haryana Village says yes to love marriages and no to Cast….Haryana’s infamous khaps are known for condoning honour killings and telling women not to wear jeans or use mobiles. but in Barsola, the winds of change are blowing….

https://timesofindia.indiatimes.com/india/haryana-village-says-yes-to-love-matches-and-no-to-caste-names/articleshow/72940377.cms

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में फिरोज खान की नियुक्ति पर वाइस चांसलर और सभी को संस्था की तरफ से सम्पर्क किया गया और उसको न्याय मिले इस पर सकारात्मक कार्यवाही की गयी…

सेवा में,

सम्मानीय प्रोफेसर राकेश भटनागर,

कुलपति,

बनारस हिंदु विश्वविद्यालय,

वाराणसी, 221005

उत्तर प्रदेश, भारत

विषय – डॉक्टर फिरोज को लेकर विश्वविद्यालय के सकारात्मक रवैये पर धन्यवाद और इसका सम्पूर्ण हल के लिये पत्र जरूर पढ़ें ….

सादर नमस्ते,

भारत देश मे “बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ” पूरे देश के जन-जन के लिये एक विशेष स्थान रखती है । वहाँ से अध्ययन करके निकले छात्र  की प्रतिभा का ज्ञान देश से छिपा नही है । अद्भुत प्रतिभा के विद्वान लोग वहाँ से निकलकर देश के शीर्ष पदों पर नेतृत्व कर रहे है जो कि विश्वविद्यालय के लिये गर्व की बात है ।

आज हमारे देश मे जो “फिरोज खान” के संस्कृत पढ़ाने  को लेकर जो माहौल बना हुआ है वह चिंतनीय और सोचनीय है ।

यह देश सभी को साथ लेकर चलने वाला है । इसमें धर्म, जाति, सम्प्रदाय बने है लेकिन किसी विशेष धर्म से सम्बंध रखने के कारण उसके अधिकारों का हनन हो जाये यह शिक्षा के लिए ठीक नही है । विश्वविद्यालय में छात्रों का ऐसे ही धरना चलता रहा तो कही फिरोज खान अपने पद पर नियुक्त होने के पहले ही इस्तीफा न दे दे । क्यों कि ऐसी स्थिति में मानसिक दवाव बहुत ज्यादा हो जाता है । कृपया आप इस मामले को सकारात्मक रूप में फिरोज खान को सम्मान के साथ पढ़ाने के लिये आमंत्रित करे और उनको हर सम्भव मदद की सान्त्वना दे । जिससे वह आंतरिक तल पर मजबूत बने रहे । आज आपके विश्विद्यालय के पास एक बहुत अच्छा मौका है कि देश मे सही मेसेज जाये और इस प्रकार की कुरीतियां जो कुछ छात्रों की व्यकितगत सोच के कारण बन गयी है उससे बाहर निकले । राजनीतिज्ञ लोग अपने अपने फायदे के लिए इस पर राजनीति करने लग जायेंगे ।

हमारी संस्था इन सबसे ऊपर सोच रखकर पूरी मनुष्य जाति के लिए काम कर रही है ।

आज हमे छोटी छोटी जातियाँ, क्षेत्र, सम्प्रदाय, अलग अलग धर्मो से देखा जाता है जो कि मनुष्य जाति के लिये बहुत ही चिंताजनक बात है । ईश्वर द्वारा बनाई गयी सृष्टि में ये मतभेद नही थे उसके लिये सभी समान पैदा होते है । हम ऐसा समाज बना रहे है कि एक दिन सब कुछ होते हुये भी कुछ नही कर पायेंगे।

अब हम आपको अपनी संस्था के बारे में अवगत कराना चाहते है –

हम आपका ध्यान एक ऐसे अधिनियम के बारे में ले जाना चाहते है जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स अधिनियम 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक अधिनियम आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस अधनियम के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस पर भी आप गम्भीरता से सोचे । जिससे अधिक से अधिक इसका लोग लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है ।

देश मे कुछ इस सम्वेदनशील मुद्दे को लेकर सकारात्मक परिणाम भी सामने आये है जिनको आपके सामने रख रहे है : –

संस्था की तरफ से लगातार सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय एवं सशकितकरण मंत्री, केंद्रीय मंत्री या इससे जुड़े हुये सभी को पत्र भेजने के बाद –

1- उड़ीसा सरकार और हरियाणा सरकार ने इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार किया और सकारात्मक बदलाव लाये ।

पहले अन्तरजातीय विवाह करने वालो को 50 हजार रुपये मिलते थे दोनों सरकारों ने इसकी राशि बढ़ाकर 2,500000 तक कर दी । समाचार पत्रों की रिपोर्ट को देखते हुये हम ये आंकड़े रख रहे है । हरियाणा सरकार ने 2017 में इन्सेंटिव बढ़ाये जाने पर मात्र एक साल में 2018 तक अंतरजातीय विवाह में तीन गुना बढोत्तरी हुयी है । इन्सेंटिव बढ़ाये जाने पर अंतरजातीय विवाह में उड़ीसा में भी बहुत बढोत्तरी हुयी है ।

2. तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की रहने वाली स्नेहा ने एक ऐसा काम कर दिखाया कि पूरे देश मे आज तक किसी ने नही किया । स्नेहा अपना धर्म या सरनेम दिखाने के लिये बाध्य नहीं है, सरकार ने इस महिला को दिया सर्टिफिकेट – अब किसी जाति या धर्म की नहीं है कोई बाध्यता ।

3- द पीपुल्स वॉइस सोसायटी संस्था के द्वारा भेजा गया खाप पंचायत को पत्र – अब खाप पंचायत जैसी संस्था जो जातिगत मामलों में बहुत ही खबरों में आती रही है इस संस्था ने भी अब एक अभियान समाज के लिए खड़ा किया है कि कोई भी खाप पंचायत में विवाह करेगा तो उसका सरनेम नही लिखा जायेगा और जातिगत मामलों से देश दूर हो इस पर खाप पंचायत काम कर रही है ।

संस्था हर राज्य में इंसेंटिव बढ़ाये जाने पर जोर दे रही है जिससे लोग अधिक से अधिक संख्या में विवाह करे ।

। संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना चाहिए साथ मे अंतरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्मों में भी विवाह होना चाहिए ।

यहाँ उल्लेख करना उचित होगा कि स्वर्गीय डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने लाहौर में जाट- पाट टोडक मंडल के 15 मई 1936 के वार्षिक सम्मेलन में भाषण देने के लिए “जाति का उन्मूलन” शीर्षक से तैयार भाषण दिया, जो वास्तव में कुछ आपत्तिजनक सामग्रियों के कारण आमंत्रण को वापस लेने के कारण अपरिवर्तित रहा। आयोजकों के रूप में सम्मिलित है। चूँकि उन्होंने अपनी लागत से छपी हुई 1500 प्रतियाँ वितरित की थीं। भाषण के पैरा 20.5 में वे लिखते हैं – डॉक्टर अंबेडकर ने 1936 में कहा था – “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अंतरजातीय विवाह ही जातिगत भेदभावों को मिटाने का अचूक उपाय है ।”

इस पूरे मसले पर हम आपके विश्वविद्यालय में आकर युवाओं के साथ इस पर कार्यक्रम करके जागरूक कर सकते है और सभी को सकारात्मक तरीके से बात करके और उनके सभी प्रश्नों के उत्तर देना संस्था की जिम्मेदारी है । आप हमें एक अवसर दे जब भी  आपको उचित समय लगे ।

भविष्य के लिये यह बहुत जरूरी है । मनुष्य ही मनुष्य का दर्द समझ सकता है । मन में जाति, सम्प्रदाय, धर्म का बीज लेकर हम सिर्फ भेदभाव कर सकते है । इसलिये सिर्फ देश को मनुष्य बनाना है जो कि हम जन्म से ही है ।

आशा करते है आप हमारी संस्था की भावनाओं को समझ रहे होंगे और जल्द से जल्द मिलने का समय देंगे ।

भवदीय

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पृथ्वी मानकतला

“सचिव”

“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”

“नई दिल्ली”

Phone: +91-124-416-4000

Mob: +91-92055-43360

http://thepeoplesvoice.in/

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Letter being sent by The People’s Voice Society to all the Independent Contestants of the Country who stood in the 17th Lok Sabha 2019

Honourable Sir,                                                                                                                                                                                                

Independent Contestant,

17th Lok Sabha. 2019.

Sub: Some suggestions for your knowledge and to act upon for Making India a Cohesive Society through Inter-caste/ Inter-religion / Inter-region marriages and party-less Parliament. Please do read the letter, it is a request……….

2019 Parliament election had very high number of Independent candidates you are one of the honoured ones. Under the present political system it takes a great courage to fight as an independent. It is ironical that powerful political parties side-line those persons who have the conviction and capability of serving the Nation. Even those who win their voices are not heard as power lies in the hand of the political parties, which forms the Government. Since, Independence Nation has been divided as legacy of British rulers into different castes, religions and regions for creating vote banks. How can we become a powerful nation with divided citizens fighting amongst ourselves as we are today?

Let’s now say few words about our Society. We are known as “The People’s Voice Society”. We have taken upon ourselves the task of making India a Cohesive Society for last 5 years though we are 10 years old prior to this we had engaged ourselves on bringing about changes in different fields. If we start mentioning those it will take much of the space. There is one act known as “The Protection of Civil Rights 1955”. Under this act if a person of lower caste marries another one higher caste, the Central and State Government pool to pay as cash incentive to the couple. Though the act is 64 years old, but it is still not very popular amongst those who could be eligible to make claim under the provisions of the said act. This was enacted by Central Government but implemented by State Governments with contribution of funds from Centre. Though RTI applications we learnt the number of persons applying for incentives were dismal. Since then we have been making representations at all possible forums to increase the incentives many folds and also include inter-religion and inter-region, as India needs to become cohesive from all angles. Only inter-caste marriages will not bring the desired results. Since we started making representations, Government of Haryana and Government of Odisha increased to Rs. 2,50,000.00 gradually up from Rs. 50,000.00 in the case of Haryana and Rs.2,00,000.00 gradually up from Rs. 20,000.00 in the case of Odisha. As per the news report Haryana showed an increase of 3 folds in the year 2018 over the year 2017. Similarly, in Odisha there has been significant increase. This statics establishes the fact that incentives will work. We have made several suggestions to Government on incentives such as reservations in jobs, income tax exemptions, free education for children etc. to mention a few. The population of India 20-30 years hence will be multi-religious and multi-cultural, Harmony amongst the citizens will have direct impact on the economic growth.

It may be pertinent to mention here Late Dr. B.R. Ambedkar in his prepared speech titled “Annihilation of Caste” for delivering at the Annual Conference of 15th May 1936 of The Jat-Pat Todak Mandal at Lahore, which in fact remained undelivered due to withdrawal of the invitation due to some objectionable contents it purported to have contained as the organisers. Since he had got 1500 copies printed at his own cost were distributed. In Para 20.5 of the speech he writes “I am convinced that the real remedy is inter-marriage. Fusion of Blood can alone create the feeling of kith and kin, and unless this feeling of kinship, of being kindred, becomes paramount, the separatist feeling—the feeling of being aliens—created by castes will not vanish”. Off course Dr. Ambedkar was at that time talking of inter-castes marriages what we are professing is inter-religion and inter-region as well for all round unification of Indian Society.

The new project, which we are planning to take up is “Political Reforms”. We are sure you will agree there is corruption inside all Political Parties without exception. In fact the provision of exemptions under the income Tax is being misused quite widely. We have obtained record through RTI there are certain regional parties who have hardly fought any elections yet they have availed the exemptions to which they are entitled? We will be putting before the public for their consideration a “New System of Governance” based on party-less parliament. In such a parliament, every member should be an educated professional politician coming out of a University dedicated to education on politics. Every constituency should be represented by a local home grown person not an implanted one. The exit age of Lok Sabha should be the entry age into Rajya Sabha, the house of elders should truly be a house of ELDERS, without any provision of nominating decoration pieces to a House where a serious business of Governance is to take place. The Parliament should elect Prime Minister and other Minsters and control the functioning of Government. The voting in Parliament should be on the basis of consciousness rather than party whip. Parliament should be functioning throughout the year with a set timetable rather than the whims and fancies of Government in power. In the event of Prime Minister losing confidence of the House a new one will be elected, thus avoiding the mid term election, with Parliament sitting for full term simultaneous election can become realty. Every law should be enacted with validity, which will require it to be reviewed and revalidated. There should also be periodical review of constitution. The Society keeps evolving, each generation has a right to decide for itself by what laws they want to be governed, constant revalidation of laws and review of constitution will make it possible.

We have tried to convey broad picture on both the Projects on which we are working, if you will give us time to discuss both the issues in greater detail and explore the possibility how we can associate with each other for the good of our country, shall be appreciated.

Looking forward to seeing you,

Kind Regards,

Prithvi Manaktala,

General Secretary,

Phone: +91-124-416-4000

Mob: +91-92055-43360

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देश के सभी स्वतंत्र प्रतियोगी जो 17वीं लोक सभा 2019 में खड़े हुये थे उनको संस्था की तरफ से भेजा जा रहा पत्र

21/10/2019

सेवा में,                                                                                                          

सम्मानीय महोदय,

स्वतंत्र प्रतियोगी,

17वीं लोक सभा, 2019

विषय – देश को एक करने के लिये अंतरजातीय विवाह, अंतर क्षेत्रीय व अंतर धर्मो में विवाह और पार्टीलेस पार्लियामेंट के विषय पर अपने विचारों को व्यक्त करें

सादर नमस्ते,-

2019 के चुनाव में जो भी प्रत्यासी स्वतंत्र खड़े हुये थे उन सबको एक पत्र हमारी संस्था की तरफ से भेजा जा रहा है । उन सभी मे एक आप सम्मानीय सदस्य है । हम आपको अपनी संस्था के बारे में बताने से पहले आपका ध्यान आज की राजनीति पर ले जाना चाहते है । अच्छे और योग्य व्यक्तियों को जो काम करते है और करना चाहते है लेकिन उनको टिकट ही नही मिल पाता है । जो स्वतंत्र खड़े होते है उनके ऊपर बहुत सारे दबाव रहते है जिनके कारण वह राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के पहले ही अलग हो जाता है और दुःख की बात ये है कि जो पार्टी चुनाव जीतती है तो जिस पार्टी की जो विचारधारा है उसी को पूरे देश मे लागू करना चाहते है । देश को इतना बांट दिया गया है कि हम सभी को कोई मजबूत कदम उठाना ही पड़ेगा । आज हमे छोटी छोटी जातियाँ, क्षेत्र, सम्प्रदाय, अलग अलग धर्मो से देखा जाता है जो कि मनुष्य जाति के लिये बहुत ही चिंताजनक बात है । ईश्वर द्वारा बनाई गयी सृष्टि में ये मतभेद नही थे उसके लिये सभी समान पैदा होते है । हम ऐसा समाज बना रहे है कि एक दिन सब कुछ होते हुये भी कुछ नही कर पायेंगे। अब हम आपको अपनी संस्था के बारे में अवगत कराना चाहते है -हम आपका ध्यान एक ऐसे अधिनियम के बारे में ले जाना चाहते है जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स अधिनियम 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक अधिनियम आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस अधनियम के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस पर भी आप गम्भीरता से सोचे । जिससे अधिक से अधिक इसका लोग लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है ।देश मे कुछ इस सम्वेदनशील मुद्दे को लेकर सकारात्मक परिणाम भी सामने आये है जिनको आपके सामने रख रहे है : -संस्था की तरफ से लगातार सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय एवं सशकितकरण मंत्री, केंद्रीय मंत्री या इससे जुड़े हुये सभी को पत्र भेजने के बाद – 1- उड़ीसा सरकार और हरियाणा सरकार ने इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार किया और सकारात्मक बदलाव लाये ।पहले अन्तरजातीय विवाह करने वालो को 50 हजार रुपये मिलते थे दोनों सरकारों ने इसकी राशि बढ़ाकर 2,500000 तक कर दी । समाचार पत्रों की रिपोर्ट को देखते हुये हम ये आंकड़े रख रहे है । हरियाणा सरकार ने 2017 में इन्सेंटिव बढ़ाये जाने पर मात्र एक साल में 2018 तक अंतरजातीय विवाह में तीन गुना बढोत्तरी हुयी है । इन्सेंटिव बढ़ाये जाने पर अंतरजातीय विवाह में उड़ीसा में भी बहुत बढोत्तरी हुयी है ।2. तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की रहने वाली स्नेहा ने एक ऐसा काम कर दिखाया कि पूरे देश मे आज तक किसी ने नही किया । स्नेहा अपना धर्म या सरनेम दिखाने के लिये बाध्य नहीं है, सरकार ने इस महिला को दिया सर्टिफिकेट – अब किसी जाति या धर्म की नहीं है कोई बाध्यता ।3- द पीपुल्स वॉइस सोसायटी संस्था के द्वारा भेजा गया खाप पंचायत को पत्र – अब खाप पंचायत जैसी संस्था जो जातिगत मामलों में बहुत ही खबरों में आती रही है इस संस्था ने भी अब एक अभियान समाज के लिए खड़ा किया है कि कोई भी खाप पंचायत में विवाह करेगा तो उसका सरनेम नही लिखा जायेगा और जातिगत मामलों से देश दूर हो इस पर खाप पंचायत काम कर रही है ।संस्था हर राज्य में इंसेंटिव बढ़ाये जाने पर जोर दे रही है जिससे लोग अधिक से अधिक संख्या में विवाह करे ।। संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना चाहिए साथ मे अंतरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्मों में भी विवाह होना चाहिए । यहाँ उल्लेख करना उचित होगा कि स्वर्गीय डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने लाहौर में जाट- पाट टोडक मंडल के 15 मई 1936 के वार्षिक सम्मेलन में भाषण देने के लिए “जाति का उन्मूलन” शीर्षक से तैयार भाषण दिया, जो वास्तव में कुछ आपत्तिजनक सामग्रियों के कारण आमंत्रण को वापस लेने के कारण अपरिवर्तित रहा। आयोजकों के रूप में सम्‍मिलित है। चूँकि उन्होंने अपनी लागत से छपी हुई 1500 प्रतियाँ वितरित की थीं। भाषण के पैरा 20.5 में वे लिखते हैं – डॉक्टर अंबेडकर ने 1936 में कहा था – “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अंतरजातीय विवाह ही जातिगत भेदभावों को मिटाने का अचूक उपाय है ।”इससे तो देश एक हो जायेगा लेकिन राजनीतिक पार्टियां फिर से अपने तरीके से देश को बांट देंगी ।आज हमें एक नये विकल्प की जरूरत है जिस विकल्प की जरूरत है जो हमें लगता है वह आपसे शेयर कर रहे है कि पार्टीलेस पार्लियामेंट होनी चाहिए । किसी पार्टी की कोई जरूरत नही है । हर व्यकित अपने क्षेत्र से स्वतंत्र खड़ा होकर चुनाव लड़े और इस तरह अलग अलग सोच के लोग जो किसी पार्टी से सम्बंध नही रखते है वह जब संसद में पहुँचेंगे तो एक अलग ही प्रारूप दिखाई देगा । सब कुछ वैसे ही चलेगा लेकिन कोई पार्टी नही होगी ।इन सबके बारे में आपसे विस्तार से चर्चा करने के लिये भेंट होना जरूरी है । जब आप समय निकाल पाये तो बताये हमारी संस्था इस पर आगे की भविष्य की कार्यशैली पर बात करेंगे ।आपसे विनम्र निवेदन है कि इस पर गम्भीरता से सोचे ।ये दोनों ही काम सोचने में लग सकता है कि सम्भव नही है लेकिन कोई भी काम ऐसा नही है जिसका विचार आया हो वह पूरा न हो ।

संस्था इस पर पूरी तरह से गम्भीर है और हर दिन इस पर काम कर रही है हो सकता इसका परिणाम हमे तुरंत दिखायी दे लेकिन भविष्य में सकारात्मक रूप लेगा

धन्यवाद

भवदीय

Description: cid:image003.jpg@01D58298.9EA83000

पृथ्वी मानकतला”सचिव”

पीपुल्स वॉइस सोसाइटी
नई दिल्ली

फोन : +91-124-416-4000

मोबाइल : +91-92055-43360

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We Have Sent Letter to All First Time elected Honourable Member of Parliament…

Date : 13/09/2019

To,

Sadhvi Pragya Singh Thakur,                                             

Honourable Member of Parliament,

Bhartiya Janta Party(BJP),

128, Ravaira Township, Phase-II, Near Mata Mandir,

Bhopal, Madhya Pradesh

First of all our Society would like to heartily congratulate you for being a first time Member of Parliament. Nation looks towards you to immensely improve the quality of work that is done in the Parliament as compared to the 16th Lok Sabha. It is further heartening to note all first time members are Women?

Let’s now introduce our Society, we are known as The People’s Voice Society. We have been in the field of bringing about social changes. For last 5 years we have undertaken a project to promote Cohesiveness in Indian Society. As you must be realising Indian Civil Society is fiercely divided into castes, religions and regions.

Some members of our Society would like to meet you personally to exchange ideas on various issues being faced by our Nation.

We shall await to know your time availability in Delhi whenever you happen to be in town.

Kind Regards,

Prithvi Manaktala,

General Secretary,

Description: Description: Description: Description: Description: Description: cid:image002.jpg@01D564B7.F3B5AC20

Phone: +91-124-416-4000

Mob: +91-92055-43360 (Mr. Pankaj Kumar)

www.thepeoplesvoice.in

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संस्था की तरफ से सरकार में बैठे और सभी सामाजिक मुद्दों में काम कर रहे इस सम्वेदनशील मुद्दे पर प्रतिष्ठित लोगो को एक कॉमन पत्र…

विषय – क्या अंतरजातीय विवाह, अन्तरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्म विवाह देश को आज जरूरत है ?

नमस्ते,
आज पूरा देश जातिवाद, धर्म के नाम पर झगड़ रहा है क्यों कि लोगो ने इसको अपनी शान-शौकत से जोड़ रखा है ।
जाति और धर्म से लोगो ने अपनी पहचान बना रखी है । समाज दिन प्रतिदिन इसकी गलत धारा में जा रहा है और लोगो मे जातिगत भेदभाव की खाई बनती जा रही है ।
हम आपको अपनी संस्था के बारे में बताना चाहते है ।
हमारी संस्था इन सबसे ऊपर उठकर बात करती है और काम कर रही है । देश को धर्म, जाति से ऊपर आना ही होगा । तभी देश एक होगा ।
हमारा देश आजाद हुआ है उस समय से लेकर आज तक बट ही रहा है । पूरे भारत देश को इतना बांट दिया गया है कि लोग अपना असितत्व ही भूल गये है । सारे धर्म, अलग अलग जाति, ढ़ेर सारे समुदाओ में मनुष्य पहले से ही बंटा हुआ है । इस धरती पर सारी सन्तान माँ के गर्भ से ही निकलती है । जिनमे कोई भेदभाव नही होता । जब बच्चा पैदा होता है तो उसको कुछ नही पता होता, लेकिन बच्चा बड़े होते ही समाज उसको बांट देता है । क्यों कि उसको ऐसा माहौल मिलता है कि वह मजबूर हो जाता है कि वह मनुष्य नही है । कोई हिन्दू है, कोई मुसलमान है, कोई क्रिश्चियन है, कोई इस जाति का है, कोई उस जाति का है ।
अब हम आपका ध्यान एक ऐसे एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस पर भी आप गम्भीरता से सोचे । जिससे अधिक से अधिक इसका लोग लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना चाहिए साथ मे अंतरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्मों में भी विवाह होना चाहिए ।
डॉक्टर अंबेडकर ने 1936 में कहा था – “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अंतरजातीय विवाह ही जातिगत भेदभावों को मिटाने का अचूक उपाय है ।”
आपस मे विवाह ही एक ऐसी कड़ी है जो आपस मे लोगो को जोड़ सकती है । विवाह एक पवित्र वन्धन है । जिसके बाद एक नया बच्चा जन्म लेता है । उसके बाद बच्चे का भविष्य और देश के भविष्य का निर्माण होता है । इनमे कोई भी भेद भाव नही होना चाहिए । हमारे मन में ये प्रश्न नही उठना चाहिए । कि हम किस जाति, धर्म के है । इससे सबसे बड़ा सकारात्मक परिणाम ये निकलकर आयेगा कि आने वाली पीढ़ी के बच्चों में से ये मानसिकता खत्म हो जायेगी । कि हम किस जाति के है । वह बच्चे अपने आपको मानवता-इंसानियत की तराजू पर तौलेंगे । इससे क्या होगा ? इससे एक दिन समाज में जातिवाद सब कुछ समाप्त हो जायेगा । संस्था की तरफ से कुछ सुझाव है कि जो भी लोग अंतरजातीय विवाह करते है । उनको ये सुविधाएं मिलनी चाहिए । साथ मे ये सुविधाएं अंतरक्षेत्रीय विवाह और अन्तरधर्म करने वालो को भी मिलनी चाहिये : –

  1. सरकार की तरफ से उनको अलग अलग राज्यो में जो भी पैसा अभी वर्तमान में दिया जा रहा है उसको बढ़ाया जाये ।
  2. फ्री हनीमून या इसी के अनुकल पैसा मिलना चाहिए ।
  3. युवक और युवती दोनों को सरकारी नोकरी मिलनी चाहिए
  4. इनकम टैक्स में छूट मिलनी चाहिए ।
  5. उनके बच्चों को फ्री शिक्षा मिलनी चाहिए ।
  6. उनके बच्चो को सरकारी नोकरी मिलनी चाहिए ।

इन पॉइंट्स को अधिक से अधिक फैलाया जाए और सरकार की अधिक से अधिक जागरूकता होनी चाहिए । इस बारे में लोगो में चर्चा होनी चाहिए ।

ये सब इसलिए है जिससे लोग शादी ज्यादा से ज्यादा करे । इन सबमे बहुत समय लग सकता है लेकिन देश में एक चिंगारी उठनी चाहिए । एक चिंगारी ही काफी है । नकारात्मक सोच से सकारात्मक सोच की तरफ आगे बढ़ने के लिए । देश बदलने का सब प्रयास करते है लेकिन कुछ भी नही बदलता है । वही प्रश्न फिर उठता है कि आखिर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश क्यों नही बदल रहा है । कही न कही हम भारी चूक कर रहे है । शायद हम सभी लोग जाति धर्म में ही उलझकर रह गये है । आशा करता हूँ आप हमारी संस्था के पक्ष को समझ रहे होंगे ।
देश मे कुछ इस सम्वेदनशील मुद्दे को लेकर सकारात्मक परिणाम भी आये है जिनको आपके सामने रख रहे है : –
1- संस्था की तरफ से लगातार पत्र भेजने के बाद उड़ीसा सरकार और हरियाणा सरकार ने इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार किया और सकारात्मक बदलाव लाये ।
पहले अन्तरजातीय विवाह करने वालो को 50 हजार रुपये मिलते थे दोनों सरकारों ने इसकी राशि बढ़ाकर 2,500000 तक कर दी जिससे अन्तरजातीय विवाह में बहुत बढोत्तरी हुयी ।

2-तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की रहने वाली स्नेहा ने एक ऐसा अद्भुत काम कर दिखाया कि पूरे देश मे आज तक किसी ने नही किया । स्नेहा अपना धर्म या सरनेम दिखाने के लिये बाध्य नहीं है, सरकार ने इस महिला को इंसानियत का दिया सर्टिफिकेट – अब किसी जाति या धर्म की नहीं है कोई बाध्यता ।
3- द पीपुल्स वॉइस सोसायटी संस्था के द्वारा भेजा गया खाप पंचायत को पत्र – अब खाप पंचायत जैसी संस्था जो जातिगत मामलों में बहुत ही खबरों में आती रही है इस संस्था ने भी अब एक अभियान समाज के लिए खड़ा किया है कि कोई भी खाप पंचायत में विवाह करेगा तो उसका सरनेम नही लिखा जायेगा और जातिगत मामलों से देश दूर हो इस पर जींद खाप पंचायत काम कर रही है ।

आप इन सब मुद्दे पर हमारी संस्था से बात करना चाहे तो हमे ख़ुशी होगी । हम इस पर बैठकर बात कर सकते है । इस पर एक सकारात्मक परिणाम लाने की दिशा में काम कर सकते है ।
संस्था ने इस मुद्दे पर सूचना का अधिकार के तहत कुछ सूचना भी मांगी थी । जिनकी जानकारी आपके साथ बांट रहे है । सभी राज्यो में सूचना का अधिकार के तहत RTI डाली जिसमे पता चला 2010 से 2017 वर्तमान तक जो हमे आकंड़े प्राप्त हुये है -उससे पता चला कि इस एक्ट के बारे में लोगो को जानकारी ही नही है । बड़े ही निराशाजनक आंकड़े प्राप्त हुए है । हमारी संस्था को लगता है इस एक्ट पर समाज मे जागरूकता फैलानी चाहिए । अधिक से अधिक लोगो तक बात पहुँचनी चाहिए । पुनः आपसे विनम्र आग्रहपूर्ण निवेदन है कि एक बार हमारी संस्था से इस बारे में बात हो तो एक सकारात्मक पक्ष आपके सामने रखूँ और बारीकियों से इस मुद्दे पर अपने कुछ अनुभव सांझा करू । एक जिम्मेदार संस्था होने के नाते हम चाहते है कि देश के विकास में हमारा भी कुछ योगदान हो ।

आशा करते है आप हमारी संस्था की भावनाओं को समझ रहे होंगे । जल्द ही आपसे व्यक्तिगत मीटिंग हो ऐसी आशा करते है ।

आपके सरकार के साथ हमारी संस्था इस मुद्दे पर किसी भी तरीके से काम कर सकती है तो हमें खुशी होगी । हमारी संस्था का भी देश को एक करने में योगदान होना चाहिये ।

भवदीय

पृथ्वी मानकतला
“सचिव”
“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”
“नई दिल्ली”

http://thepeoplesvoice.in/

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