4 arrested for stabbing Muslim man travelling with Hindu woman

­This is an article written after reading  a news item In Hindustan Times of 4th April  on page 5

captioned as: 4 arrested for stabbing Muslim man  travelling with  Hindu woman.

Mr.Arun Dev

Please refer to the news on page 5 of Hindustan Times of 4th April reading as:

” 4 arrested for Stabbing Muslim man travelling with Hindu women.”

Mr. Dev, Our Society The People’s voice , first of all makes a strong suggestion on the use of word as the Caption of the news. This is in itself separates the two Communities and draws a dividing line.

Those who fought for liberation of the Country from British Rule faced  the wrath of the British  who while leaving created a strong verge in the Communities .Leaders of the time like Mahatma Gandhi ,Jawahar Lal Nehru, vallabh Bhai Patel and scores of other including Bhim Rao Ambedkar  tried their best to bring about  unity amongst the population by coming up with many slogans and also tried to bring in  provisions in the Constitution to uplift those Communities who  were  less in numbers to the level of the Community larger in  number.

History is the evidence that all such slogans which were taken have not helped the Country to become cohesive. The plan of dividing the Society naming  certain sections as minority have proven to be wrong .The verge has become permanent and its deepening and widening with the passage of time.

The People’s Voice Society has strong views on this issue. All those Articles of the Constitution need to be amended which create a separate class with certain extra rights and reservations. All citizens of India are human beings, which faith or  route they follow to offer their personal prayers is a matter of personal choice but no section should have been treated with privileges which is denied to the other section. This has been the root cause  of the  divide but now it has deepened with the fresh legislation to keep the divide alive.

To make India a cohesive Country all sections of civil society need to be integrated in a  large bouquet .Marriages between different castes ,religions and regions  is the only way.

Government needs to incentivise such marriages .We have an existing legislation enacted in the year 1955 known as “Protection Of  Civil Rights Act 1955“. Under this Act, marriages between different castes are  incentivised , which at present is Rs 2,50,000/- per couple .Our pleas to the  Government is to make it more deep and wide to include marriages between different religions and regions at the time .The scope of the incentives must be made  very attractive to compel parents to look for spouses for their children from other castes, religions and regions. If this method of incentive is adopted in 20-30 years from now the face of India will change .

The law which has been enacted by few States to curb marriage between different religions should be repealed forthwith. The purpose for which it has been enacted can be served by the existing laws.

Kind Regards

Prithvi Manaktala

General Secretary 

New Delhi

Tel: +91-124-245-0090

Mob: +91-92055-43360

Website:- www.thepeoplesvoice.in

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सोसायटी का विशेष आग्रह है कि उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश की तरह अब लव जिहाद पर गुजरात सरकार ने भी कानून बना दिया है । अपने राज्य में ये कानून न बनाये

सादर नमस्ते,    

विषय :- सोसायटी का विशेष आग्रह है कि उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश की तरह अब लव जिहाद पर गुजरात सरकार ने भी कानून बना दिया है । अपने राज्य में ये कानून न बनाये

“उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून, 2020 जो बना है और जो अभी गुजरात मे गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 2003 में संशोधन करके गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता सुधार विधेयक 2021 लागू हुआ है । यह देश को एकजुट करने के लिये सही नही है । इससे तो लोगों में आपस मे नफरत पैदा होगी । आपस में धर्मो की दीवारें खड़ी हो जायेगी । लोगो को अहसास होता रहेगा कि वह किसी धर्म से सम्बंध रखते है । ऐसे कानून का सोसायटी सख्त विरोध करती है ।

भविष्य में ऐसा न हो इसलिये सोसायटी का विशेष आग्रह है कि अपने राज्य में ऐसे कानून नही बनने दे ।

हमारी सोसायटी इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 6 वर्षो से लगातार गम्भीरता से पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही है ।

लव जिहाद की चर्चा पिछले कुछ समय से लगातार होती है । विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के विषय पर खबरे आती रहती है ।

सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती आ रही है । इन सबका हल क्या होगा, जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है । ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या नफरत फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । लोग क्यों बदलना चाहते है धर्म।  ये ठीक नही है ।

सोसायटी के पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर ध्यान दे ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य उत्तर प्रदेश में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है । हम सभी अंदर से एक ही है । अब प्रश्न उठता है कि जाति, क्षेत्र, धर्म की जो रेखाएं हमारे बीच खींच दी है । उससे बाहर आना चाहिए । पहले क्या हुआ । किसने कितना अपराध, जुर्म किया है इस पर बदला लेने से अच्छा है कि हम वर्तमान में कोई ऐसी कड़ी योजना बनाये जिससे देश व पूरी मानवजाति एक ही छत के नीचे हो । कोई भी आपस मे मतभेद न हो और  सोसायटी को लगता है कि आपस मे अंतरजातीय, अन्तरक्षेत्रीय, अन्तरधर्मो में विवाह ही भाईचारा को ला सकता है ।

आशा है कि आपकी राज्य सरकार इस पर विचार करेगी । हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है ।  ऐसे कानून पर सोसायटी को लगता है कि फिर से चिंतन, मंथन, अच्छे से विचार विमर्श होना चाहिये ।

सोसायटी आग्रह करती है कि राज्य सरकार ऐसे संवेदनशील विषयो पर बिना राजनीति के मानव सेवा को देखते हुये कदम उठायेगी । जिससे पूरी मानवता के लिये एक सकारात्मक निर्णय हो और सभी मे एक दूसरे के प्रति जाति, क्षेत्र, धर्म न आकर भाईचारा का ख्याल आये ।  ऐसा सोसायटी सोचती है ।

आशा है आप इन सभी बातों पर ध्यान देंगे और सोसायटी को अपने राज्य में इस विषय पर काम करने का मौका देंगे । जिससे सोसायटी का अनुभव राज्य में एक सकारात्मक ऊर्जा को लेकर आये और पूरी मानवता के लिये कार्य होता रहे ।

धन्यवाद

भवदीय

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पृथ्वी मानकतला

सचिव

पीपुल्स वॉइस सोसाइटी
नई दिल्ली

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👆सोसायटी ने सारे मुख्यमंत्री को पत्र भेजा

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उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बाद अब लव जिहाद के खिलाफ कानून गुजरात में भी क्यों ?

सादर नमस्ते,

सारे न्यूज चैनल, अखवार, न्यूज वेव पोर्टल से खबर पता चली है कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बाद अब लव जिहाद के खिलाफ कानून गुजरात में भी शामिल हो जायेगा । गुजरात विधानसभा में धर्मांतरण के खिलाफ कानून पास किया गया है । यह कानून कहाँ तक ठीक है इस पर तो पूरा देश भविष्य में चिंतन करेगा ।

गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने मीडिया में जानकारी दी है कि हम “गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट-2003” में संशोधन करने जा रहे है उक्त विल को विधान सभा मे “गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता सुधार विधेयक 2021” के नाम से पेश किया गया । अभी हमारी सोसायटी इस क़ानून का विरोध इसलिए करती है क्यों कि इससे तो देश मे एक खौफ, डर की स्थिति पैदा हो जायेगी । देश का नवयुवक कभी भी अपने धर्म के बहार विवाह की सोच भी नही रखेगा ।

इस पर बहुत सारे लोग जो सही में विवाह जैसे पवित्र बंधन को सही मानते है वह भी इस कानून के दायरे में आ जाएंगे ।

सोसायटी उन गलत लोगो के साथ बिल्कुल भी नही है जो धोखा देकर या जबरजस्ती धर्म परिवर्तन करते है । ऐसे लोगो को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए ।

भारत देश ही एक ऐसा देश है जो सबको साथ लेकर चल सकता है । आज धर्मांतरण जैसे कानून देश को सिर्फ बांटने का काम करेंगे ।

जब से ये कानून बन रहे है देश मे डर पैदा होता जा रहा है ।।

सोसायटी ऐसे असंवेदनशील, असामाजिक तत्व घृणा फैलाने वाले और जबरजस्ती विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन करने वालो का सख्ती से विरोध करती है, वह कोई भी किसी भी धर्म का पालन करता हो ।

लव जिहाद की चर्चा  लगातार होती है । सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती आ रही है । सोसायटी के विचारों को उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री को अवगत कराया था क्यों कि

सोसायटी ऐसे विषय पर 6 सालों से लगातार कार्य कर रही है कि इन सबका हल क्या हो जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है ?  ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या, नफरत फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । धर्म को कोई भी सरकार जबरजस्ती नही पालन करवा सकती है । ये व्यक्ति का बिलकुल निजी मामला है । कोई भी किसी भी धर्म मे विवाह करे । उस पर आपत्ति नही होनी चाहिए ।

सोसायटी को ऐसा लगता है कि हमारे पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर विशेष ध्यान दे ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को गुजरात सरकार अपने राज्य के हर घर तक इतनी जागरूकता फैलाये । जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह व अंतर धर्मो में विवाह हो इस पर भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है ।

देश तभी एक हो सकता है जब हमारे मन से जाति, क्षेत्र, धर्म की दीवार समाप्त हो ।

ऐसा कानून से क्या हुआ – उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तो अंतर-धार्मिक विवाह रुकवाने की खबरे लगातार आ रही है । इस कानून से तो सिर्फ अपने धर्मो में विवाह ही सही माना जायेगा ।

हमारी सोसायटी ने सभी राज्यो के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भेजे कि ऐसे कानून नही बनने चाहिए ।

आशा है आप हमारी सोसायटी की सोच को अपने राज्य में जो भी ठीक लगता है उसको पारित करेंगे और अंतरजातीय विवाह पर जो कानून है उसको अधिक से अधिक राज्य में जगरुकता फैलायेंगे ।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

सचिव

पीपुल्स वॉइस सोसाइटी
नई दिल्ली

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action taken :- https://hindi.oneindia.com/news/gujarat/gujarat-govt-brought-a-bill-to-assembly-as-amendments-the-gujarat-freedom-of-religion-act-2003-611020.html?story=1

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Law on interfaith marrriage not against any religion

SIR,

Namaste,

The  undersigned  The General Secretary of  THE PEOPLE’S VOICE SOCIETY  had this chance to read your interview  given to  the journalists  Mr.Chetan Chauhan and Mr.Madan Jaira .

I would like to draw your attention to a specific point of your  interview wherein you have stated in reply to a question on inter-faith marriages that the” MP Religion of Freedom  law”   is not against any religion. It is against Forced and Fradulent inter-religious marriages Which lead to Jihad and other kind of violence in the society.

As  the head of the government it is within the realm of your duties to curb lawlessness and maintain peace and tranquility in the society. But SIR, the question is  Is it happening? Is the law helping in maintaining the desired peace? My feeling is – It is not . The percentage of  such people may be very small as compared to the total population who indulge in the unlawful activities .Majority of citizens are peace loving .As a Chief Minister it is your concern that all communities  make progress. when all communities are going to interact with each other ,It is natural that relationships will develop. If such genuine relationships are going to be curbed by the same administration who is working for their advancement, Is it  not that the administration is acting against itself?

SIR, our society THE PEOPLE’S VOICE  has been working for last 5 years on the subject of inter-caste ,inter-religion and inter-region marriages .Such marriages need to be incentivised ,so that parents of marriageable age children should look for the eligible matches from other religion instead of trying to kill their own children. The incentives currently being  given  under the law –“Protection Of Civil Act Of 1955”are too meagre to produce any significant results .

According to the recent data obtained from Public Relations Department (Rewa):

yearAmount given as an incentiveNo of couples
2019-202014 Crore84Lakh742
2020-202111crore92Lakh596

The above data clearly indicates the rise in inter-caste marriages.

We are proposing changes to this law .It must include inter-religion and inter-region. We shall be thankful if you will form a committee to look into this matter. Our society will be willing to participate in deliberations to make a list of incentives.

Kind Regards

Prithvi Manaktala

General Secretary 

New Delhi

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मध्यप्रदेश सरकार में गृहमंत्री को पत्र ”मध्यप्रदेश विधि विरुध्द कानून 2020 से सम्बंधित

सेवा में,                                                                       13/03/2021

सम्मानीय नरोत्तम मिश्रा,

गृह मंत्री,

मध्यप्रदेश,

भोपाल

विषय :- मध्यप्रदेश विधि विरुध्द कानून 2020 से सम्बंधित

सादर  नमस्ते,                                                                                                                                                                      

सभी अखबारों, न्यूज चैनल, वेव पोर्टल और अन्य स्रोतों से पता चला है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2021 को एक कार्यक्रम के दौरान आप मध्यप्रदेश सरकार में गृहमंत्री के पद पर रहकर “मध्य प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून”, 2020 जो बना है । उसका समर्थन करते हुए कहा है कि लव जिहाद वालो पर कठोर से कठोर सजा दी जायेगी । हमारी सोसायटी ने 30 दिसम्बर 2020 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी इस सम्बन्धित पत्र भेजा हुआ है ।

” मध्य प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध कानून, 2020 जो बना है । वह एक पक्ष को देखते हुए ठीक है लेकिन दूसरा पक्ष देखते है जो सच मे बिना लव जिहाद का मामला हुए विवाह करते है तो उनके लिए ऐसा कानून ठीक नही है । सही इरादा रखने वाला युवा वर्ग भी इसमे आ जायेगा ।  इस कानून में लव जिहाद तथा सामूहिक धर्म परिवर्तन पर सरकार से सख्त कार्यवाही की  जायेगी और दस वर्ष की सजा का भी प्रावधान है” ।

हमारी सोसायटी इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 6 वर्षो से लगातार गम्भीरता से पूरी जिम्मेदारी से काम कर रही है ।

देश ऐसे कानूनों से एक नही होगा और 2 धर्मो के बीच नफरत पैदा होती जा रही है । एक धर्म का युवक या युवती दूसरे धर्म के युवक या युवती से कभी भी विवाह करने की नही सोचेगा । यदि वह सही नियत और सच्चे इरादे से विवाह करना भी चाहे तब भी विवाह नही करेगा ।

सोसायटी ऐसे असंवेदनशील, असामाजिक तत्व घृणा फैलाने वाले और जबरजस्ती विवाह के नाम पर धर्म परिवर्तन करने वालो का सख्ती से विरोध करती है, वह कोई भी किसी भी धर्म का पालन करता हो ।

कुछ समय से लव जिहाद की चर्चा  लगातार होती है । सोसायटी इससे सम्बन्धित सभी विषयों पर काम करती है ।

सोसायटी इस विषय पर कार्य कर रही है कि इन सबका हल क्या हो जिससे सब कुछ ठीक हो जाये । कब तक ये सब चलता रहेगा ।

अंतरजातीय विवाह पर जब कानून है तो उसको सरकार क्यों सही से पारित नही करती है ?  ये जातिगत मतभेट सबसे पहले खत्म होना चाहिये । ये जितने भी मामले आते है । सब हमारे अंदर सिर्फ ईर्ष्या नफरत फैलाने वाले होते है । वह किसी भी धर्म मे हो रहा हो । जो जिस धर्म का है वह उसी धर्म को माने । लोग क्यों बदलना चाहते है धर्म।  ये ठीक नही है ।

सोसायटी के पास इन सबका हल है । कृपया हमारी इन बातों को जो हम कह रहे है । उस पर ध्यान दे ।

हम आपका ध्यान इस अंतरजातीय विवाह एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । सोसायटी आग्रह करती है कि इस एक्ट को अपने राज्य मध्य  प्रदेश में जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिससे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । सोसायटी का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन इसके अलावा अन्तरक्षेत्रीय विवाह भी होना चाहिए । हम सभी अंदर से एक ही तरह से है तो इतना मतभेद क्यों हो रहा है । 

आशा है कि आप इस अंतरजातीय विवाह एक्ट पर काम करेंगे ।

हम जड़ से बीमारी को खत्म करना चाहते है ।

सोसायटी आग्रह करती है कि इस पर जरूर सरकार फिर से विचार करके जो सही है वह करेगी  ।

पूरे देश के लिए अंतरजातीय विवाह ही एक हल है जिस पर आज नही सोचा गया तो बहुत देर हो जायेगी ।

हम इस संवेदनशील मुद्दे पर आपके साथ हर तरीके से साथ है । सोसायटी के अनुभव सरकार के काम आये तो हमारी पूरी टीम को खुशी होगी।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

सचिव

पीपुल्स वॉइस सोसाइटी
नई दिल्ली

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मोबाइल : +91-92055-43360

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मुसलमानों की शिक्षा पर डेटा प्रदान करें

दिनांक 05.03.2021

श्री राम जी सुकुमार रंगनाथनसंपादक – इन-चीफहिन्दुस्तान टाइम्स

नई दिल्ली

विषय: श्री के व्यक्तिगत विचार मुसलमानों की शिक्षा पर डाटा प्रदान करने पर जॉन कुर्रियनहिंदुस्तान टाइम्स, 03.03.2021 में प्रकाशितप्रिय श्री रंगनाथन,मैं पीपुल्स वॉयस सोसाइटी की ओर से लिख रहा हूँ, एक दशक पुराना, पैन इंडियन, गुड़गांव आधारित गैर-लाभ संगठन मानवीय मूल्यों को स्थापित करने के उद्देश्य से, सभी मुद्दों पर जनजागरण के स्तर को बढ़ाने, विशेष रूप से सामाजिक, हर नागरिक के अधिकारों के बारे में और दायित्व ।

हमारी दृष्टि भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में देखना है, एक शिक्षित युवा, स्वस्थ, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और जीवंत समाज के साथ, वर्ग विभाजन के अवरोध से । जब मैंने इस लाइन को पढ़ा ′′ शैक्षिक सुधार समुदायों (लोगों) के विकास को बढ़ावा देने और बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है । मैं बहुत ज्यादा दंग रह गया कि इतने बुद्धिजीवी व्यक्ति कैसे श्री जॉन कुर्रीन ने समुदाय (लोगों) को जातियों में बाँट कर मुस्लिमों की शिक्षा पर डाटा देने को कहा लगता है जनाब जॉन कुर्रियन जाति और धर्म में विश्वास करता है लेकिन पीपुल्स वॉयस सोसाइटी COHESIVE SOCIETY पर विश्वास करता है जहां कोई जाति नहीं, कोई रंग नहीं या कोई धर्म नहीं है ।

जैसा कि उन्होंने यह भी लिखा था कि ′′ जब आधिकारिक शिक्षा के आंकड़े और मुसलमानों पर 2001 के जनगणना के आंकड़े आखिरकार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए गए थे, तो उनकी ′′ अदृश्य ′′ तुलनात्मक गिरावट की सही सीमा सामने आई थी । ′′जैसा कि आपके न्यूज़ पेपर में प्रकाशित हुआ है कि श्रीमान जॉन कुर्रियन पिछले दशक से नुकसानदेह समूहों की शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं । हमारे समाज का मानना है कि देश की शिक्षा प्रणाली को एकीकृत करना चाहिए जो मदरसे द्वारा उत्पादित किया जा रहा है ।स्वतंत्र देश के नागरिक और एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते, मैं अपने विचार साझा करना चाहता हूं कि मैं श्री के व्यक्तिगत विचारों पर असहमत हूं । जॉन मुसलमानों की शिक्षा का डाटा इकट्ठा कर प्रिंट मीडिया में प्रकाशित कर उन्हें बेनकाब कर मुसलमानों की गरिमा को हथौड़ा ।हमारा समाज पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से अंतरजातीय, अंतरजातीय और अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा दे रहा है । प्रोत्साहन को गहरा और व्यापक करने के लिए विभिन्न फोरा पर आग्रह कर रहे हैं ।कोई कानून, नियम और विनियम बल में नहीं रहना चाहिए जो समाज में अलग अलग वर्ग है ।

इस न्यूज़ लिंक पर की गई कार्रवाई- https://www.hindustantimes.com/opinion/provide-data-on-the-education-of-muslims-101614691531951.html

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Provide data on the education of Muslims

Dated 05.03.2021

Mr. Sukumar Ranganathan                                

Editior – in- Chief

Hindustan Times

New Delhi

Subject:        A Personal views of Mr. John Kurrien on Provide data on the education of Muslims 

                       Published in Hindustan Times, 03.03.2021

Dear Mr. Ranganathan,

I am writing on behalf of The People’s Voice Society, a decade old, Pan Indian, Gurgaon based non-profit organization with an objective of instilling human values, raising levels of public awareness on all issues especially social, concerning every citizen of their rights and obligations. Our vision is to see India as a developed economy, with an educated young, healthy, peaceful, progressive and vibrant society, devoid of class divisions.

When I read this line “Educational reform is critical to promoting and sustaining the development of communities (people).  I was very much stunned that how such intellectual person Mr. John Kurrien divided the community (people) in castes and asks to provide data on the education of Muslims, It seems Mr. John Kurrien believes in caste and religion but The People’s Voice Society believes on COHESIVE SOCIETY where there is no caste, no colour or no religion.

As he also wrote “When official education statistics and the 2001 Census data on Muslims was finally made publicly available, the true extent of their “invisible” comparative decline was revealed”.

As published in your News Paper that Mr. John Kurrien has been working in the field of education of disadvantageous groups for last decade. Our Society believes to unify the country’s education system should be such which does not create a distinct group, such as being produced by Madrasa.

Being a Citizen of Independent Country and a Social Activist, I would like to share my views that I am disagree on the personal views of Mr. John to collect the data on the education of Muslims and publish in print media and expose them and hammered the dignity of Muslims.

Our Society for last more than 5 years has been promoting inter-caste, inter-religion and inter- region marriages. Urging at various fora to deepen and broaden the incentives.

No laws, rules and regulations should remain in force which different segments in the Society. 

Action Taken on this news link – https://www.hindustantimes.com/opinion/provide-data-on-the-education-of-muslims-101614691531951.html

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दिल्ली में युवक की हत्या:परिवार का आरोप- जय श्रीराम कहने पर मर्डर किया गया, पुलिस ने कहा- यह सांप्रदायिक मामला नहीं

दिल्ली में युवक की हत्या : परिवार का आरोप- जय श्रीराम कहने पर मर्डर किया गया, पुलिस ने कहा- यह सांप्रदायिक मामला नहींसादर नमस्ते,12 जनवरी 2021 की खबर को पढ़कर इस पत्र को लिख रहा हूँ। खबर की हेडलाइन है – दिल्ली में युवक की हत्या:परिवार का आरोप- जय श्रीराम कहने पर मर्डर किया गया, पुलिस ने कहा- यह सांप्रदायिक मामला नहींइस तरीके की खबरों को लगातार पढ़ता आ रहा हूँ । जिसमें अलग अलग धर्मो को लेकर लोगो मे नफरत फैलाई जाती है । इस खबर को पढ़ने के बाद सभी राजनीतिज्ञ दल , कुछ स्वार्थी राजनीति के पीछे छिपकर अपने धर्म को महान बताकर दूसरे के प्रति निंदा करके नफरत फैलाते है । इन लोगो की खबर को ही मत छापिए ।जो देश को बांटते है।बॉलीबुड एक्टर कंगना रौनत ने ट्वीट किया और एक दूसरे पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘इस पिता के दर्द को महसूस करो और अपने बच्चों या फैमिली मेंबर्स के बारे में सोचो। एक और दिन, एक और हिंदू की सिर्फ जय श्रीराम कहने पर लिंचिंग की गई।’ ऐसे खुलेआम हिन्दू, हिन्दू करके ये क्या दिखाना चाहती है ।दिल्ली से भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। जिसमें वे कह रहे हैं कि अगर रिंकू का नाम रेहान होता तो उसकी हत्या देश की सबसे बड़ी खबर होती। हर नेता उसके दरवाजे पर होता। रिंकू शर्मा जी की हत्या दिल्ली में ऐसा पहला अपराध नहीं है। अंकित सक्सेना, ध्रुव त्यागी, डॉ नारंग, राहुल, अंकित शर्मा सब को ऐसे ही तो मारा गया । यही भी कंगना की तरह देश को धर्मो में बांट रहे है ।ये जो लोग सिर्फ एक ही धर्म की बात करके लोगो में वैमनस्य फैलाते है । आज हर जगह इसी खबर की चर्चा चल रही है जिसमे सभी अखबार, चैनल्स शामिल है । सिर्फ धर्म सम्प्रदाय इसी को दिखा रहे है । हमारी सोसायटी ऐसी नकारात्मक खबरों का पूर्ण विरोध करती है । लगातार नकारात्मक घटना ही दिखाना ठीक नही होता है ।क्या देश मे गरीबी, बेरोजगारी नही है ? इस पर क्यों कभी बात नही होती है । क्या समाज मे और कोई समस्या नही है जिस पर हम ध्यान ही नही देते है । अखबार, टीवी चैनल बहुत कुछ कर सकते है । यदि सकारात्मक खबरों को वरीयता दी जाये ।ऐसी जातिगत, धर्म, सम्प्रदाय बाली खबरों से देश सिर्फ बटेगा । आशा है आप हमारी सोसायटी की भावनाओं की भाषा को समझेंगे ।अब हम आपको अपनी सोसायटी से अवगत कराना चाहेंगे ।द पीपुल्स वॉइस सोसायटी जाति, क्षेत्र, सम्प्रदाय, धर्म से ऊपर मानवता के लिये काम कर रही है । इन्ही सब कारणों से देश छोटे छोटे हिस्सो में बट गया है । जिसका असर पूरे देश मे समय समय पर खबरों के माध्यम से देखने को मिलता रहता है जो अभी इस खबर से आई है । जिसकी आपके अखबार की लिंक भी साथ मे भेज रहा हूँ https://www.google.com/…/murder-of-bjp-yuva-morcha…द पीपुल्स वॉइस सोसायटी का मुख्य उद्देश्य है कि अंतरजातीय विवाह, अन्तरक्षेत्रीय विवाह और अंतरधर्मो में विवाह होना चाहिये । भारत सरकार द्वारा कानून प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स 1955 में एक्ट आया था जिसमे अंतरजातीय विवाह होना चाहिए, लेकिन कितने लोग आज तक इस एक्ट को जान पाये है लेकिन संस्था का मानना है कि इस एक्ट को सभी लोग जागरूक हो और सरकार इस एक्ट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाये । अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिये साथ मे अन्तरधर्मो में भी विवाह होना चाहिये ।धन्यवादभवदीयपृथ्वी मानकतलासचिव”द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी””नई दिल्ली”फोन : +91-124-2450090/91/92मोबाइल : +91-92055-4336वेवसाइट : http://www.thepeoplesvoice.in/ब्लॉग : https://tpvblog.wordpress.com

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Supreme Court: High time society learns to accept inter-caste, inter-faith marriages

इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स और द हिंदू में 10 फरवरी 2021 की खबर पढ़ने के बाद बहुत अच्छा लगा । ऐसी खबरें पढ़कर मन मे ऊर्जा का संचार होता है और अच्छे से काम करने का बल मिलता है ।
इसकी लिंक भी आपके साथ शेयर कर रहा हूँ –
https://www.indiatoday.in/amp/india/story/supreme-court-inter-caste-inter-faith-marriages-karnataka-couple-1767474-2021-02-09

https://www.google.com/amp/s/www.thehindu.com/news/national/karnataka/siddaramaiah-pushes-for-more-inter-caste-inter-faith-marriages/article33796894.ece/amp/

आपके सकारात्मक प्रयास से देश मे अन्तरजातीय विवाह, अन्तरधर्मो में विवाह हो इस पर बहुत अच्छा प्रयास किया गया है । सुप्रीम कोर्ट के द्वारा भी सकारात्मक जबाब आया कि देश मे अंतरजातीय, विवाह, अन्तरधर्मो में विवाह होने चाहिये ।
हमारी सोसायटी लगातार इसी पर कार्यरत है और पूरी मानवजाति एक हो और देश के जनजन से जाति, धर्म , सम्प्रदाय का जो जहर फैल गया है । इसी से ही उसमें गिरावट आयेगी। धीरे धीरे ही इस कुरीति को समाप्त किया जायेगा ।
सोसायटी लगातार 5 सालों से देश के कोने कोने तक इस मैसेज को पहुंचा रही है ।
हर राज्य के मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय मंत्री, अखवारों के सम्पादक, रिपोर्टर और अन्य सामाजिक संस्थाओं को जागरूक करते है ।
जिसमें हम लोग ईमेल के द्वारा पत्र, कॉल के द्वारा सम्पर्क और पर्सनल मीटिंग से अपनी बात को रखते है ।

अब हम अपनी सोसायटी द पीपुल्स वॉइस सोसायटी के बारे में अवगत कराना चाहते है । सोसायटी जाति, क्षेत्र, सम्प्रदाय, धर्म से ऊपर मानवता के लिये काम कर रही है । इन्ही सब कारणों से देश छोटे छोटे हिस्सो में बट गया है । जिसका असर पूरे देश मे समय समय पर खबरों के माध्यम से देखने को मिलता रहता है ।
द पीपुल्स वॉइस सोसायटी का मुख्य उद्देश्य है कि अंतरजातीय विवाह, अन्तरक्षेत्रीय विवाह और अंतरधर्मो में विवाह होना चाहिये । भारत सरकार द्वारा कानून प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स 1955 में एक्ट आया था जिसमे अंतरजातीय विवाह होना चाहिए, लेकिन कितने लोग आज तक इस एक्ट को जान पाये है लेकिन सोसायटी का मानना है कि इस एक्ट के बारे में सभी लोग जागरूक हो और सरकार इस एक्ट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाये । अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिये साथ मे अन्तरधर्मो में भी विवाह होना चाहिये ।
हमारी सोसायटी की पूरी टीम इसमे आपके साथ अपने अनुभव शेयर करना चाहती है। यदि आप हमें मीटिंग के लिए समय दे तो अच्छा रहेगा ।
हम सभी सोसायटी को एक करने का प्रयास करते रहे जिसका परिणाम धीरे धीरे बहुत ही सकारात्मक होता चला जाएगा ।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

सचिव
“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”
“नई दिल्ली”
फोन : +91-124-2450090/91/92
मोबाइल : +91-92055-4336
वेवसाइट : http://www.thepeoplesvoice.in/
ब्लॉग : https://tpvblog.wordpress.com

Action taken

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अंतरजातीय विवाह पर जो आंकड़े मिले है और जो पैसे दिये गए है वह सराहनीय है । साथ मे अन्तरक्षेत्रीय व अन्तरधर्मो में भी विवाह होने चाहिये !!

सम्मानीय शिवराज सिंह चौहान,                                                                                                             06/02/2021                                     

मुख्यमंत्री,

मध्यप्रदेश,

भोपाल

विषय :- अंतरजातीय विवाह पर जो आंकड़े मिले है और जो पैसे दिये गए है वह सराहनीय है । साथ मे अन्तरक्षेत्रीय व अन्तरधर्मो में भी विवाह होने चाहिये !!

सादर नमस्ते,

मध्य प्रदेश में जिला रीवा जनसंपर्क विभाग द्वारा खबर देखी है जिसकी लिंक भी आपके साथ शेयर कर रहा हूँ – https://www.dprmp.org/NewsDetail.aspx?newsid=977550&disid=33

कि  अंतरजातीय विवाह करने पर सरकार ने बहुत प्रोत्साहित किया है । और जो आंकड़े मिले है वह सकारात्मक दिशा की ओर  ले जाते है । हमारे लगातार पत्र सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर जाते रहे है और अभी भी लगातार भेजे जा रहे है ।

प्रदेश में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के मकसद से अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना में पिछले 2 वर्षो में 1338 दम्पत्तियों को अनुसूचित-जाति कल्याण विभाग ने 16 करोड़ 76 लाख रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी है।

विभाग ने वर्ष 2019-20 में 742 दम्पत्तियों को 14 करोड़ 84 लाख रूपये और वर्ष 2020-21 में अब तक 596 दम्पत्तियों को 11 करोड़ 92 लाख रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी है। योजना में समाज में ऊँच-नीच और छुआछूत के विचारों को त्याग कर इन विचारों से ओत-प्रोत स्वर्ण युवक अथवा युवती द्वारा अनुसूचित-जाति की युवती अथवा युवक से विवाह करने पर ऐसे दम्पत्तियों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जाता है। योजना में प्रत्येक अंतर्जातीय विवाह करने वाले आदर्श दम्पत्ति को प्रोत्साहन राशि के रूप में 2 लाख रूपये विभाग द्वारा दिये जाते हैं।

ये बहुत ही प्रशंसा की बात है कि सरकार इस पर कार्य कर रही है । सरकार को इसके आगे भी कार्य को बढ़ाना चाहिए । हमारी सोसायटी अंतरजातीय विवाह हो , इसके साथ साथ अन्तरक्षेत्रीय व अन्तरधर्मो में भी विवाह होना चाहिये । तभी पूरा देश एक हो सकता है । हम सिर्फ जाति में ही नही बटे है । हम क्षेत्र और धर्मो में भी बट गये है । एक दूसरे से विवाह जातिगत, क्षेत्रीय व अन्तरधर्मो में भी होना चाहिये । सोसायटी इसके पक्ष में है और पिछले 5 सालों से हर राज्य में जागरूकता फैला रही है । सोसायटी की तरफ से सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय मंत्री व अन्य इस संवेदनशील मुद्दे पर कार्यरत लोगो, संस्था को अवगत कराया जाता है जिससे समाज को एक नई दिशा मिल सके ।

अब हम आपका ध्यान एक ऐसे एक्ट के बारे में ले जाना चाहते है जो लगभग 64 बर्षो पहले आया था । जिसके बारे में कुछ ही लोग जानते है । सामान्य जनता को इसका पता ही नही है । भारत सरकार द्वारा कानून “प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955” में अंतरजातीय विवाह के लिये एक एक्ट आया था । आज लगभग 64 साल होने को है । लेकिन इस एक्ट के बारे में समाज मे जागरूकता बहुत कम है । हमारी संस्था आग्रह करती है कि इस एक्ट को समाज के हर ब्यक्ति तक जागरूकता फैलाने में मदद करे। जिसे इस एक्ट का लोग अधिक से अधिक लाभ उठा पाये । सभी राज्यो में इसका अलग अलग पैमाना है । जो राशि दी जाती है । जितनी राशि बढ़ेगी उतना अच्छा रहेगा और अन्य सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।  सबसे बड़ी सुरक्षा मिलनी चाहिए।  जिससे समाज मे कोई डर न हो ।   एक बार फिर से दोहरा रहा हूँ । संस्था का सबसे बड़ा मुख्य पहलू है कि आपस में अंतरजातीय विवाह तो होना ही चाहिए, जो एक्ट कहता है लेकिन साथ मे अंतर धर्म और अंतर क्षेत्र में विवाह होना चाहिये ।

एक बार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने 1936 में कहा था – “मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अंतरजातीय विवाह ही जातिगत भेदभावों को मिटाने का अचूक उपाय है ।”

आशा है हमारी सोसायटी के जो सकारात्मक सुझाव है उस पर राज्य अच्छे से ध्यान देगी और इस संवेदनशील मुद्दे को और आगे बढायेगी ।

सोसायटी का यही मानना है कि हम सब एक हो जाये । कोई मतभेद न रहे जो कि विवाह ही एक रास्ता है जिससे पूरी मानवजाति एक हो जायेगी ।

धन्यवाद

भवदीय

पृथ्वी मानकतला

“सचिव”

“द पीपुल्स वॉइस सोसाइटी”
“नई दिल्ली”

फोन : +91-124-416-4000

मोबाइल : +91-92055-43360

Website :- http://thepeoplesvoice.in/

Blog :- https://tpvblog.wordpress.com/

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